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राजे पर नहीं सियासी दबाव का असर, संघ को भी दिखाया ठेंगा

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ललित गेट को मुद्दा बनाकर सरकार पर हमलावर विपक्ष के आक्रामक रुख का राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर पहले ही कोई असर नहीं था, लेकिन उनकी सियासी घेराबंदी करने की संघ की कोशिश भी नाकाम साबित हुई है।
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पिछले दिनों संघ की ओर से भी टूटे मंदिरों के मुद्दे को उछाल कर उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई। उन्हें सियासी संकट में फंसता देख वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवारी और राजवीर सिंह सरीखे नेताओं ने खिलाफत की ताल भी ठोकी। मगर राजे के करीबियों की मानें तो उनके आत्मविश्वास पर इन सबका असर बिलकुल नहीं है।
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राजे पर नहीं हुआ असर

आत्मविश्वास का ही नतीजा है कि राजे को संघ की घेराबंदी की भी चिंता नहीं है। जयपुर के टूटे मंदिरों के मामले में उन्होंने राज्य के संघ नेताओं को ठेंगा दिखा दिया है।

टूटे मंदिरों को बहाल करने की मांग को लेकर संघ के स्वयंसेवकों ने बीते बृहस्पतिवार को जयपुर में चक्का जाम कर उनकी सियासी मुश्किल बढ़ाने का काम किया था।

मगर राजे पर चक्का जाम का असर नहीं हुआ। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश के संघ नेतृत्व और सरकार के बीच सेतु का जिम्मा संभाल रहे नेताओं को भी नाकामी हाथ लगी है। वसुंधरा ने उनकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार के खिलाफ अभियान रोकने के एवज में संघ की ओर से राजे के सामने जयपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त और जिला प्रशासन के मुखिया को बदलने की मांग रखी गई थी।

लेकिन वसुंधरा ने इन दोनों शर्तों में से किसी पर भी अब तक अमल नहीं किया है। राजे की दलील है कि मेट्रो रेल और शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मंदिरों के साथ-साथ कुछ मस्जिदों को भी हटाया गया है। संघ की ओर से मंदिरों को उसी जगह पर रहने देने की मांग की जा रही है।
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