पिछले दिनों राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव को पीछे की सीट पर बैठाया गया था।
भाजपा महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी अमित शाह की नजर जब मुलायम पर पड़ी, वह हाथ पकड़कर उन्हें वहां से उठा लाए ओर आगे की कतार में बैठाया।
मंगलवार को नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में मुलायम से गर्मजोशी से मुलाकात की। मुलायम ने भी मोदी को अपनी ओर आता देख सीट से उठकर उनका स्वागत किया।
गर्मजोशी से मिले मोदी-मुलायम
लोकसभा नतीजों के पहले तक एक दूसरे से तंज और तानों में ही बात कर रहे भाजपा और सपा नेता पिछले दिनों में जब भी मिले, गर्मजोशी से मिले। एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखा और गले लगाने से भी नहीं चूके।
दोनों दलों की मोहब्बत और अदावत की कहानी में आज फिर एक नया पन्ना जुड़ गया। मोदी ने एक ऐसा फैसला किया, जिसे सुनकर मुलायम की बांछे भी खिल गईं।
मुलायम ने जब मोदी के फैसले के बारे में सुना तो कहा, 'हम इस कदम का स्वागत करते हैं।'
अब हिंदी में ही बात करेंगे मोदी
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला किया है कि वे राजनयिकों के साथ हिंदी में ही बात करेंगे। अंतरराष्ट्रीय नेताओं से होने वाली उनकी सभी मुलाकातों के लिए दुभाषिया नियुक्त किया जाएगा। उन मुलाकातों में भी जिनमें राष्ट्राध्यक्ष अंग्रेजी बोलने में सक्षम होंगे, मोदी हिंदी में ही बात करेंगे।
राजधानी के कई राजनयिकों का मानना है कि मोदी अंग्रेजी में बातचीत करने में सक्षम हैं।
उन्हें अंग्रेजी बोलने वाले नेताओं की बात समझने के लिए दुभाषिये की जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन राष्ट्रीय भाषा के महत्व को देखते हुए उन्होंने हिंदी को अपनी बातचीत की भाषा चुना है।
दुभाषिये किए जाएंगे नियुक्त
हालही में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई थी। राजपक्षे ने अंग्रेजी में ही बात की लेकिन मोदी को बात समझने के लिए दुभाषिये की जरूरत नहीं पड़ी।
हालांकि राजपक्षे की बातों का जवाब मोदी ने हिंदी में दिया और दुभाषिये ने उन बातों का अंग्रेजी में अनुवाद किया। उन्होंने ओमान के सुल्तान के साथ हुई मुलाकात में भी यही प्रोटाकॉल जारी रखा।
नवाज, करजाई से कैसे की बात?
पिछली मुलाकातों में जिन राष्ट्राध्यक्षों ने हिंदी या उर्दू में बात की, मोदी ने बिना दुभाषिये के सीधी बात की। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ बिना किसी दुभाषिये के सीधे बात की थी।
हामिद करजाई के साथ भी मोदी ने बिना किसी दुभाषिये के बात की। करजाई की पढ़ाई भारत में ही हुई है। मोदी के साथ उन्होंने उर्दू में बात की और कई हिंदी के शब्दों का प्रयोग भी किया।
अटल के पदचिन्हों पर मोदी
हिंदी में बात करने का फैसला कर मोदी ने भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी के पदचिन्हों पर ही कदम बढ़ाया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी बातचीत में दुभाषिये का प्रयोग करते थे।
हालांकि द्विपक्षीय वार्ताओं में वे उन्हीं नेताओं के साथ हिंदी में बात करते थे, जो खुद अपनी राष्ट्रीय भाषा में बात करते थे।
वे तब भी दुभाषियों की प्रयोग करते थे, जब उन्हें विदेशों अनुवादक का लहजा समझ में नहीं आता था। मोदी फैसले पर मुलायम ने खुशी जाहिर की है। मुलायम सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग के पक्षधर हैं।