सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लंबे समय तक जीवन साथी को यौन संबंध बनाने की अनुमति नहीं देना मानसिक क्रूरता है और यह तलाक का आधार हो सकता है।
जस्टिस सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय और प्रफुल्ल चंद्र पंत की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि नि:संदेह जीवन साथी को पर्याप्त कारणों के बगैर ही लंबे समय तक यौन संबंध नहीं बनाने देना मानसिक क्रूरता जैसा है।
अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसने एक व्यक्ति को सिर्फ इसी आधार पर विवाह विच्छेद की अनुमति दे दी गई थी कि उसकी पत्नी ने लंबे समय तक शारीरिक संबंध नहीं बनाने दिए थे।
इस व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी यौन संसर्ग से इनकार करने के साथ ही कई तरीकों से उसके साथ क्रूरता कर रही है।