भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष सुदर्शन राव ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही संस्था से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उनके इस्तीफे के कारण अभी तक साफ नहीं है, वहीं सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि उन्हें प्रति माह डेढ़ लाख रुपए के मानदेय से वंचित किया जा रहा है।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जब राव से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि बीते 24 नवंबर को ही उन्होंने इस्तीफे की पुष्टि कर दी है लेकिन उन्होंने इस बात से इंकार किया यह कदम उन्होंने मानदेय की वजह से उठाया है। उन्होंने कहा कि वो अभी सरकार की ओर बातचीत का इंतजार कर रहे हैं। इस समय उन्हें कुछ कहना नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ये इस्तीफा निजी कारणों से दिया है।
सूत्रों का कहना है कि राव का इस्तीफा न तो अभी स्वीकार कर लिया गया है और न ही उसे अस्वीकृत किया गया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को संबोधित अपने इस्तीफे में राव ने लिखा है कि 'मैं अपनी सरकार के रास्ते में असुविधा का कारण बना जिसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं। मैं यह कार्यालय संतोष के साथ छोड़ रहा हूं, मैं आईसीएचआर में अपने कार्यकाल के दौरान कुछ और भी अच्छा कर सकता था।'