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ICHR से सुदर्शन की जल्दी विदाई पर उठे सवाल

Fri, 27 Nov 2015 01:24 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष सुदर्शन राव ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही संस्था से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उनके इस्तीफे के कारण अभी तक साफ नहीं है, वहीं सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि उन्हें प्रति माह डेढ़ लाख रुपए के मानदेय से वंचित किया जा रहा है।
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जब राव से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि बीते 24 नवंबर को ही उन्होंने इस्तीफे की पुष्टि कर दी है लेकिन उन्होंने इस बात से इंकार किया यह कदम उन्होंने मानदेय की वजह से उठाया है। उन्होंने कहा कि वो अभी सरकार की ओर बातचीत का इंतजार कर रहे हैं। इस समय उन्हें कुछ कहना नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ये इस्तीफा निजी कारणों से दिया है।

सूत्रों का कहना है कि राव का इस्तीफा न तो अभी स्वीकार कर लिया गया है और न ही उसे अस्वीकृत किया गया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को संबोधित अपने इस्तीफे में राव ने लिखा है कि 'मैं अपनी सरकार के रास्ते में असुविधा का कारण बना जिसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं। मैं यह कार्यालय संतोष के साथ छोड़ रहा हूं, मैं आईसीएचआर में अपने कार्यकाल के दौरान कुछ और भी अच्छा कर सकता था।'
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यह मानद पद है

राव को मानदेय देने पर विवाद बीते 23 सितंबर को ही खड़ा हो गया था जब आईसीएचआर के जनरल काउंसिल की 81 वीं बैठक हुई थी। आईसीएचआर की जनरल काउंसिल बैठक के रिकॉर्ड्स की मानें तो अध्यक्ष के लिए मानदेय की समस्या का 'सर्वसम्मति से हल' हो गया।

इस प्रस्ताव को मंत्रालय के पास 'विचार' के लिए भेज दिया गया है। हालांकि कि काउंसिल की बैठक के रिकॉर्डस में इस बात का कहीं कोई जिक्र नहीं है कि अध्यक्ष को कितना मानदेय दिया जाएगा।

इस संबंध में सूत्रों की मानें तो मानदेय के लिए डेढ़ लाख रुपए प्रतिमाह की मांग की गई थी। सूत्रों ने अनुसार 'संस्था के अध्यक्ष का पद मानद पद है और इससे पहले के किसी भी अध्यक्ष ने यहां से कोई आय नहीं अर्जित की'।
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संघ से जुड़े रहे हैं

सूत्रों के अनुसार 'जब राव की नियुक्ति हुई थी तो उन्हें इन सब बातों के बारे में पता था। सरकार भी किसी चीज को अचानक से नहीं बदल सकती। इस बारे में राव को भी अनौपचारिक रुप से सूचित किया गया है।'

बताते चलें कि राव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इतिहास शाखा के अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के सदस्य थे। राव काकतीय विश्वविद्यालय में इतिहास और पर्यटन प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

उन्हें बीते साल जुलाई 2014 में आईसीएचआर के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति पर भी खासा विवाद हुआ था।
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