आदर्श घोटाले में फंसे केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को बृहस्पतिवार को बड़ी राहत मिल गई। सीबीआई ने उन्हें क्लीन चिट देते हुए बांबे हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करते हुए उन्हें निर्दोष बताया है।
एजेंसी ने कहा कि उनके पास ऐसे कोई सुबूत नहीं हैं, जिससे शिंदे द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर अपने किसी व्यक्ति को विवादास्पद सोसायटी की सदस्यता दिलाने का पता चल सके। इसलिए उन्हें कानूनन पूर्व मुख्यमंत्री शिंदे को आरोपी बनाने की जरूरत महसूस नहीं होती है।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण वातेगांवकर ने याचिका दायर कर शिंदे को आरोपी बनाने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कोलाबा में स्थित 32 मंजिला इमारत में शिंदे का कथित तौर पर बेनामी फ्लैट है।
वातेगांवकर ने यह भी कहा था कि शिंदे ने स्वर्गीय मेजर एन डब्ल्यू खानखोजे को आदर्श सोसाइटी का सदस्य बनाने का सुझाव दिया था।
हालांकि सीबीआई ने कहा है कि उन्हें शिंदे को मौजूदा जांच में आरोपी बनाने की जरूरत महसूस नहीं होती।
मामले में मुख्य साजिशकर्ता और पूर्व विधान पार्षद कन्हैया लाल गिडवानी ने जांच आयोग के सामने गवाही दी थी कि शिंदे ने खानखोजे को सदस्य के रूप में शामिल करने को कहा था। जबकि सीबीआई ने कहा कि इस तथ्य की पुष्टि नहीं की जा सकती क्योंकि गिडवानी की मौत हो चुकी है।
सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी के बाबू की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है, ‘एजेंसी को ऐसे कोई सुबूत नहीं मिले हैं, जिससे खानखोजे और शिंदे के पारिवारिक संबंधों का खुलासा होता हो। गिडवानी ने आयोग के समक्ष जो बयान दिया है, उसकी पुष्टि के लिए रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि खानखोज को शिंदे ने शामिल किया था।’