हिंदी फिल्मों में आपने मानसिक रोग अस्पताल में मरीजों को बिजली के झटके देने वाले के कई सीन देखे होंगे। लेकिन हकीकत में अब ऐसा नहीं हुआ करेगा।
सरकार की ओर से प्रस्तावित मेंटल हेल्थ बिल अगर लागू होता है, तो मानसिक रोगी अब अपने इलाज का तरीका खुद चुन सकेंगे। इसके अलावा उन्हें बिना एनेस्थिसिया के बिजली के झटके भी नहीं दिए जा सकेंगे।
स्वास्थ्य सचिव के देसीराजू ने आईएएनएस को बताया, 'कैबिनेट ने पिछले हफ्ते इस विधेयक को हरी झंडी दे दी है।' अब इसे संसद से मंजूरी मिलनी बाकी है।
अगर यह बिल पारित होता है, तो मानसिक स्वास्थ्य सेवा का अधिकार सभी लोगों को मिल जाएगा। इसके अलावा बढ़िया गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं किफायती हो जाएंगी और बिना किसी भेदभाव के सभी को मिलेंगी।
देश की आबादी का एक से दो फीसदी हिस्सा शिजोफ्रेंनिया और बाइपोलर डिस्ऑर्डर जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों से पीड़ित हैं। इसके अलावा करीब 5 करोड़ लोग डिप्रेशन या एंग्जाइटी के शिकार हैं।