सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को धार्मिक गुरू आशाराम बापू को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने उनके आश्रम में 2008 में दो लड़कों की मौत के मामले में सीबीआई जांच का निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है।
जस्टिस पी. सदाशिवम् की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में सीबीआई जांच की जरूरत अदालत को नहीं प्रतीत होती। राज्य पुलिस की ओर से जांच ही पर्याप्त है। पीठ ने शांतिभाई जी वघेला व अन्य की ओर से दायर याचिका पर एजेंसी को जांच करने का आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
याद रहे कि आश्रम में ग्यारह वर्षीय अभिषेक वघेला व उसके दस वर्षीय चचेरे भाई दीपेश वघेला अप्रैल, 2008 में अहमदाबाद में आशाराम बापू के मोटेरा आश्रम के आवासीय स्कूल से लापता हो गए थे। इसके बाद उनके शव आश्रम के करीब साबरमती नदी के किनारे पाए गए थे।
गुजरात सीआईडी ने 30 अगस्त को दायर किए गए आरोप पत्र में आशाराम बापू के अहमदाबाद आश्रम में कार्यरत सात लोगों पर दोनों लड़कों की संदिग्ध मौत के मामले में कथित भूमिका निभाने का आरोप लगाया था। आरोप पत्र में उदय संगनी, पंकज सक्सेना, योगेश भाटी, अजय शाह, कौशिक वानी, विकास खेमका और मिनकेतन पात्रा का नाम लिया गया था।
क्राइम ब्रांच इन लोगों की भूमिका की जांच कर रहा था। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर जनता की मांग पर यह मामला 2008 में सीबीआई को सौंपा गया था। इस मसले में जांच के दौरान एक साल बाद गैरइरादन हत्या का मामला दर्ज किया गया था और आश्रम के सात लोगों के खिलाफ मुकदमा किया गया।
आसाराम का नाम अक्सर विवादों के घेरे में आता रहा है। हालांकि इस मामले में उन पर कोई आरोप नहीं था। लेकिन बापू सहित दो अन्य के खिलाफ उनकी संस्था के पूर्व पदाधिकारी राजू चंडोक ने हत्या के प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज कराया था। चंडोक पर उसी रात घर लौटते वक्त अज्ञात व्यक्तियों ने गोलियां चलाई थीं। एक गोली कंधे और दूसरी उनकी छाती में लगी थी। यह मामला अभी निचली अदालत में लंबित है।