हमेशा की तरह इस चुनाव में भी हलफनामे में संपत्ति की गलत सूचना देने वाले ज्यादातर उम्मीदवार चुनाव आयोग की कार्रवाई की गाज से बच जाएंगे। दरअसल आयकर विभाग ने कर्मचारियों और अधिकारियों की कम संख्या का रोना रोते हुए आयोग की उम्मीदवारों के हलफनामे की बारीकी से जांच का आग्रह ठुकरा दिया है।
दरअसल आम चुनाव को पारदर्शी बनाने और काले धन के बढ़ते इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए आयोग ने आयकर विभाग से उम्मीदवारों के हलफनामे में दी गई संपत्ति के ब्यौरों की कड़ी और विस्तृत जांच का आग्रह किया था।
हालांकि आयकर विभाग ने चुनाव में विजय हासिल करने और दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवारों की संपत्ति की विस्तृत जांच और हलफनामे में घोषित संपत्ति और वास्तविक संपत्ति के मिलान का आश्वासन जरूर दिया है।
आयकर विभाग से आयोग ने किया था अनुरोध
आयोग ने बीते दिनों आयकर विभाग से लोकसभा चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों के हलफनामे में दर्शाई गई संपत्ति और वास्तविक संपत्ति की जांच का अनुरोध किया था। आयोग ने काला धन पर रोकथाम और चुनाव को पारदर्शी और स्वच्छ बनाने की आयोग की पहल का स्वागत तो किया, मगर कर्मचारियों के अभाव का हवाला देते हुए सभी उम्मीदवारों के हलफनामे की जांच करने में असमर्थता जता दी।
आयकर विभाग ने आयोग को चुनाव जीतने और रनर अप उम्मीदवारों के हलफनामे में घोषित संपत्ति और उनकी वास्तविक संपत्ति का मिलान करने और जांच करने का आश्वासन जरूर दिया है।
आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक आम चुनाव में धनबल का प्रभाव बेअसर करने के लिए व्यय पर्यवेक्षक के रूप में आयकर विभाग के साढ़े तीन सौ से अधिक अधिकारियों की कड़ी नजर देश के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र पर होगी।
संदेहास्पद लेन-देन पर होगी नजर
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर विभाग के अधिकारियों की फौज को चुनाव के दौरान होने वाले संदेहास्पद लेन-देन और खर्चों पर नजर रखने के लिए तैनाती कर दी है। ताकि चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल और वोट खरीदने की कोशिश नाकाम हो सके।
आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल संदेह के घेरे में आने वाली संपत्ति के ब्यौरे की जांच में विभाग जुटा हुआ है। दूसरी ओर चुनाव के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों को हाईटेक बनाते हुए उन्हें मोबाइल और लैपटॉप दिया गया है ताकि देश के किसी भी कोने से बिना वक्त गंवाएं वे अपनी सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकें।
व्यय पर्यवेक्षक के रूप में आयकर विभाग के अधिकारी प्रत्याशियों के पोस्टर, विज्ञापन, रैली और परिवहन खर्च के अलावा इलाके में होने वाले संदेहास्पद लेन-देन पर नजर रखेंगे।