बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के ‘मजबूत नेतृत्व में मजबूत भारत’ के नारे का मखौल उड़ाया है।
उन्होंने कहा है जब करोड़ों मुसलमान भाजपा के नेता के नाम से ही डर जाते हैं तो मजबूत भारत का सपना कैसे पूरा हो सकता है।
नीतीश ने भागलपुर में अल्पसंख्यक बहुल इलाके की एक चुनावी रैली में कहा कि भारत जैसा देश पनडुब्बियों, मिसाइल या बम की तादाद बढ़ा कर मजबूत नहीं हो सकता। यह देश मजबूत होगा इसमें मौजूद एकता और विविधता को बढ़ा कर।
'भाजपा नेता के नाम से ही डर जाते हैं करोड़ों मुसलमान'
नीतीश ने कहा कि भारत विविधता से भरा है जहां लोग अलग-अलग धर्म का पालन करते हैं। तमाम भाषाएं बोलते हैं और असमान भौगोलिक इलाकों में रहते हैं।
उन्होंने कहा कि जब करोड़ों मुसलमान एक पार्टी के नेता से डर जाएं तो भारत कैसे मजबूत होगा। एक नेता जो देश को एक नहीं रख सकता है वह इसका भला भी नहीं कर सकता।
जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता नीतीश ने लोगों को भाजपा से अलग होने की वजह भी समझाई।
'अटल बिहारी के रास्ते से भटक गई है भाजपा'
नीतीश ने कहा, जब हमने महसूस किया है कि भाजपा अब एक नए अवतार ले चुकी है और यह अटल बिहारी वाजपेयी के रास्ते से भटक कर अयोध्या में मंदिर बनाने के मुद्दे की ओर जा रही है तो गठबंधन से अलग होने का फैसला किया गया।
नीतीश ने कहा कि भाजपा अब जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए संविधान की धारा 370 को हटाने की बात कर रही है। ऐसे हालात में जनता दल (यूनाइटेड) को भाजपा का साथ छोड़ना ही था।
भागलपुर में 24 अप्रैल को मतदान होगा। यहां भाजपा के शाहनवाज हुसैन, जनता दल के अबू कैसर और राष्ट्रीय जनता दल के बुल्लो मंडल के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।
पवार ने फिर साधा मोदी पर निशाना
एनसीपी प्रमुख शरद पवार का कहना है कि भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के हाथों में सत्ता सौंपना भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर अशगुन है क्योंकि मोदी के हाथों हम भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं का तिरस्कार देख चुके हैं।
पवार को मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत नारे पर भी सख्त ऐतराज है। उनका कहना है कि नेहरू गांधी परिवार भारत की एकता का प्रतीकात्मक प्रतिनिधि है।
पवार ने एक बार फिर मोदी की तुलना तानाशाह हिटलर से की। उन्होंने कहा कि हमने हिटलर को देखा है, वह लोकतांत्रिक ढांचे से चुना गया था। उसने सारी सत्ता अपने पास केंद्रित कर ली और इसका दुष्परिणाम बाद में जनता को भुगतना पड़ा। आज इसका ज्वलंत उदाहरण भाजपा में आडवाणी, जोशी और जसवंत सिंह को भुगतना पड़ रहा है।