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..तो 2002 में नीतीश ने क्यों नहीं दिया इस्तीफा?

Mon, 15 Apr 2013 03:28 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को जदयू के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन गुजरात और नरेंद्र मोदी का नाम लिए बगैर उनके विकास मॉडल तथा उनकी राजनीति पर जमकर प्रहार किया।
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गुजरात दंगों के कारण हमेशा आलोचनाओं के घेरे में रहे नरेंद्र मोदी की उन्होंने प्रत्यक्ष आलोचना नहीं की लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ कर यह जता दिया कि वे उदार, धर्मनिरपेक्ष व समावेशी राजनीति के पक्षधर हैं।

हालांकि नीतीश के भाषण के बाद सोशल मीडिया पर सेक्युलरिज्म की उनकी धारण पर ही सवाल उठने लगे। ट्विटर पर पूछा गया कि 2002 में नीतीश कुमार ने गोधरा कांड के बाद रेलमंत्री पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया।
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राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भी कहा है कि गुजरात में दंगे के समय नीतीश कुमार केंद्र में रेल मंत्री थे लेकिन उन्होंने कोई कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रामेश्वर चौरसिया ने भी गोधरा कांड के वक्त नीतीश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाया है।

उन्होंने पूछा है, 'उस वक्त नीतीश कुमार रेल मंत्री थे। रेल मंत्री रहते हुए वे कैसे साबरमती एक्सप्रेस हिंसा को रोक पाने में नाकाम रहे।'

नीतीश के भाषण के बाद ट्विटर पर भी ऐसे ही सवाल पूछे जा रहे हैं-

अविनाश भट‏@avinashbhat01 ने पूछा है-

नीतीश कुमारजी, अगर आपने रेलमंत्री के रूप में गांधरा कांड को रोक पाते तो गुजरात दंगे न होते।

भाजपा और जदयू के अलग होने के आशंकाओं के बीच कुछ लोगों ने उन्हें गठबंधन खत्म करने की भी सलाह दी है।

प्रकाश सिंह ‏@singh_prakash 4h पर कहा है-

भाजपा ओर जदयू को अब अलग हो जाना चाहिए, ये जितना जल्दी हो उतना अच्छा।

विजय ‏@centerofright 12 Apr ने कहा है-

अगर जदयू राजग से अलग हो जाए तो नरेंद्र मोदी को उन्हें एक फूलों का गुलदस्ता भेंट करना चाहिए।

नीतीश के भाषण के बाद से ही ट्विटर पर नीतीश, बीजेपी और एनडीए ट्रेंडिंग में बने हुए हैं।
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