उर्दू के वरिष्ठ शायर और गीतकार निदा फाजली ने बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की तुलना पाकिस्तानी आंतकी अजमल आमिर कसाब से कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक साहित्यिक पत्रिका को लिखे अपने पत्र में उन्होंने अमिताभ और कसाब को किसी और का बनाया हुआ खिलौना बताया है।
निदा फाजली ने पत्रिका को लिखे पत्र में कहा है, 'एंग्री यंगमैन को 70 के दशक तक ही कैसे सीमित किया जा सकता है। 70 के दशक से ज्यादा गुस्सा तो आज की जरूरत है और फिर अमिताभ को एंग्री यंगमैन की उपाधि से क्यों नवाजा गया? वे तो सिर्फ अजमल आमिर कसाब की तरह बने खिलौना हैं। एक को हाफिज सईद ने बनाया था और दूसरे को सलीम जावेद की कलम ने गढ़ा था। खिलौने को फांसी दे दी गई, लेकिन उस खिलौने को बनाने वाले को पाकिस्तान खुलेआम उसकी मौत की नमाज पढऩे के लिए आजाद छोड़े हुए है। दूसरे खिलौने की भी प्रशंसा की जा रही है, लेकिन खिलौना बनाने वाले को भुला दिया गया।'
निदा फाजली के इस बयान ने साहित्य जगत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। लेखक असगर वजाहत ने निदा फाजली के बयान की निंदा करते हुए इसे हास्यास्पद और मूर्खतापूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह पत्र लिखने वाले की बौद्धिक दरिद्रता पर अफसोस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कसाब को ना तो हाफिज सईद ने बनाया है और ना ही अमिताभ को सलीम जावेद ने। कोई भी इंसान अपने परिवेश, शिक्षा और संस्कार से बनता-बिगड़ता है। इन दोनों को समानांतर रखना मूर्खतापूर्ण और हास्यास्पद होगा।
वहीं, कवि असद जैदी ने फाजली की बात का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि निदा साहब ने दोनों के बीच में सही समानांतर रेखा खींची है। जैदी के मुताबिक सत्तर के दशक में अमिताभ ने बड़े पर्दे पर कई ऐसे फासीवादी किरदार निभाए जो गैर लोकतांत्रिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने वाले थे और ऐसे किरदारों को नायक बनाकर दर्शकों के बीच लाया गया। यह आज के आतंकवाद की तरह ही थे। यह किरदार निश्चित रूप से सलीम जावेद की जोड़ी ने ही बनाया था।