इतालवी नौसेनिकों के दो भारतीय मछुआरों को मारने के मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने नौसेनिकों के लिए मृत्युदंड मांगने की सिफारिश की है।
उन्होंने दोनों नौसेनिकों को मृत्युदंड देने वाले कानून के अंतर्गत आरोपी बनाने की स्वीकृति मांगी है लेकिन इससे विदेश मंत्रालय के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को गृह मंत्रालय से नौसेनिकों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मांगी है। जबकि विदेश मंत्रालय लगातार उनके लिए कम सजा की मांग कर रहा था।
एनआईए के इस फैसले से विदेश मंत्रालय के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है। इससे पहले विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने इटली सरकार को दोनों नौसेनिकों को मृत्युदंड के तहत आरोपी न बनाने का भरोसा दिलाया था।
नौसेनिकों के जमानत पर अपने देश लौटने के बाद जब उन्होंने भारत लौटने से मना कर दिया था, तब विदेश मंत्रालय ने यह भरोसा दिलाया था।
'मछुआरों को समझा लुटेरा'
इटली के ऑयल टेंकर एनरिका लेक्सी की निगरानी में लगे दो नौसेनिकों ने केरल के दो मछुआरों को फरवरी 2012 में मार दिया था।
आरोपियों के वकील मासीमिलियानो लातोरे ने कहा कि उनके मुवक्किलों ने मछुआरों को समुद्री लुटेरा समझा और चेतावनी देने के लिए पानी में गोली चलाई थी। नौसेनिकों ने भी जान से मारने के इरादे से गोली चलाने से इनकार किया है।
इस संबंध में साल 2002 में पास हुआ एक कानून भी मुश्किल बन गया है। भारत का क्षेत्रीय दावा 12 नॉटिकल माइल तक है और यह कानून उसी पर ही लागू होता है, जबकि मछुआरों की हत्या इस क्षेत्र से दूर हुई थी।
विदेश मंत्रालय की कोशिश नौसेनिकों को इस कानून की जद से बाहर लाना है क्योंकि कोर्ट उन्हें मौत की सजा दे सकता है।