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अब 10 लाख के इनामी आंतकियों की बारी

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एटीएस (एंटी टेरररिस्ट स्कवॉड) अब पूर्वांचल और पटना विस्फोट कांड के फरार आतंकियों की तलाश में जुट गई है। बम एक्सपर्ट हैदर और दस लाख का इनामी डाक्टर शहनवाज एटीएस के टारगेट पर हैं। इसके लिए एटीएस और आईबी, सीमा पर तैनात अर्धसैनिक बलों की खुफिया एजेंसियों का भी सहयोग ले रही हैं।
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आतंकी वकास समेत चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद एनआईए (नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी) ने समस्तीपुर (बिहार) निवासी आतंकी तहसीन अख्तर को गिरफ्तार करने के लिए यूपी एटीएस के अधिकारियों से मदद मांगी थी। यूपी एटीएस और बिहार पुलिस पटना बम ब्लास्ट के बाद से ही तहसीन के पीछे लगी हुई थी।

काफी दिनों से जानकारी मिल रही थी कि वह पटना विस्फोट के बाद से झारखंड के रांची के मूल निवासी हैदर अली के साथ फरार है। पता चला कि वह नेपाल स्थित आईएसआई के अड्डे में मौजूद है। वकास से उसने मोदी की सभा में गड़बड़ी फैलाने के लिए एक टीम बनाने की बात कही थी।
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तहसीन को किया है गिरफ्तार

वकास से पूछताछ के बाद एटीएस की मदद से एनआईए ने तहसीन को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। इनामी आतंकी की गिरफ्तारी के बाद पूर्वांचल के पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।

इंडियन मुजाह्दिन की कमर तोड़ने के लिए एटीएस ने तहसीन के साथी हैदर अली, आजमगढ़ जिले के शहनवाज, आरिज खान,  मोहम्मद साजिद उर्फ बड़ा साजिद, मोहम्मद खालिद और मिर्जा सादाब बेग की तलाश कर रही है।

एटीएस सूत्रों की मानें तो तहसीन के बाद हैदर और डाक्टर शहनवाज बम बनाने के एक्सपर्ट हैं और ये कभी भी अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं।
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...तो इकबाल भटकल होगा आईएम चीफ

सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के बीच चर्चा है कि तहसीन की गिरफ्तारी के बाद देश से फरार इकबाल भटकल आईएम का चीफ हो सकता है।

साथ ही, यासीन भटकल को पुलिस की कैद से छुड़ाने के लिए आतंकी किसी भी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इकबाल के साथ उसका भाई रियाज भटकल भी पाकिस्तान में रहता है।

ऐसे काम करता है आईएम 
कैंट, कचहरी और शीतलाघाट बम विस्फोट की जांच में शामिल पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि इंडियन मुजाहिदीन पुलिस की तरह पहले अपने टारगेट के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए संबंधित स्थान की रेकी करता है।

रेकी की रिपोर्ट वे अपने आका तक पहुंचाते हैं। इसके बाद रेकी में शामिल एक आतंकी बम एक्सपर्ट के साथ संबंधित स्थान पर विस्फोटक रखता है। किसी घटना को अंजाम देने के लिए आतंकी तीन टीमें बनाते हैं। घटना के बाद पहले वे गैर जिलों में भागते हैं और फिर वहां से इंटरनेट के माध्यम से कोड भाषा में सूचना अपने आका और अन्य टीमों को देते हैं।

पूर्वांचल से फरार आतंकी अपने करीबियों और स्लीपिंग माड्यूल को फोन कर उनके संपर्क में रहते हैं। इस प्रकार की कॉल को कई बार एटीएस ने सर्विलांस में रिकार्ड भी किया है।
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