नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने उत्तराखंड के चीफ सेक्रेटरी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
उत्तराखंड त्रासदी को दायर याचिका के मामले में तीन हफ्ते पहले नोटिस जारी करने के बाद भी राज्य की ओर से किसी के पेश न होने के चलते ट्रिब्युनल ने यह आदेश दिया है।
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के महानिदेशक के खिलाफ भी जमानती वारंट जारी किया है क्योंकि उनकी तरफ से भी कोई पेश नहीं हुआ।
पीठ ने कहा, ‘दोनों पक्षों का सुनवाई के दौरान पेश होना बेहद जरूरी है क्योंकि इसके बिना जनता के लिए बेहद अहम मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो सकती। हम इन उत्तरदाताओं के खिलाफ 20 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करते हैं।’
ट्रिब्युनल ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 26 अगस्त तय की है। अपना जवाब दायर करने के लिए दो हफ्ते का समय देने के साथ पीठ ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से पूछा कि उन्होंने अब तक क्या किया है और उनके नींद से जागने के लिए उत्तराखंड त्रासदी काफी नहीं है। पीठ ने अन्य सरकारी एजेंसियों से भी इस तरह की प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया।
ट्रिब्युनल ने यह भी साफ कर दिया कि पर्यावरण व वन मंत्रालय, उत्तराखंड सरकार और अन्य प्रशासन को 2 जुलाई के आदेश में उठाए गए प्वाइंट पर विशेष ढंग से काम करना होगा। पीठ ने उन्हें अब तक कराए गए पर्यावरणीय अध्ययन का सार भी पेश करने को कहा है।
याचिकाकर्ता वरिष्ठ अधिवक्ता राज पंजवानी हालांकि पीठ द्वारा अतिरिक्त समय देने के पक्ष में नहीं थे। इस बीच एनजीटी ने उत्तराखंड के आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक और भारतीय मौसम विभाग के साथ नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ जारी वारंट को वापस ले लिया।
इन्होंने पीठ को बताया कि ट्रैफिक जाम की वजह से वह देरी से पहुंचे।
मानसूनी बारिश से आई आफत
उत्तराखंड त्रासदी की मुख्य वजह ग्लेशियर का पिघलना और मानसूनी बारिश रही।
भू विज्ञान मंत्रालय के सचिव शैलेश नायक के अनुसार बाढ़ सिर्फ बारिश की वजह से ही नहीं आई बल्कि बर्फ के पिघलने से भी मुसीबतें ज्यादा बढ़ी। राज्य में मानसून कम से कम दो हफ्ते पहले ही आ गया।
इस समय में सर्दियों की बर्फ मौजूद होती है। जब बारिश हुई तो बर्फ भी पिघलनी शुरू हो गई, जिससे नदियों में पानी की मात्रा हद से ज्यादा बढ़ गई।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने कभी भी यह घोषित नहीं किया कि राज्य में बादल फटे हैं। तेज बारिश के साथ आए मलबे ने काम और खराब किया। भू विज्ञान मंत्रालय पूरी हिमालयन रेंज में मौसम की भविष्यवाणी को सटीक करने पर काम करता है।
नायक ने बताया कि उनका मंत्रालय मौसम की जानकारी देने के लिए मोबाइल सर्विस शुरू करने की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि आज लांच हुई सेटेलाइट इनसेट-3डी से देश में मौसम की भविष्यवाणी हासिल करने में मदद मिलेगी।