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मोदी ने पाकिस्तान को न्योता देकर चौंकाया

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एक दिन पहले संसद भवन में माथा टेक कर देश को नया संदेश दे चुके नरेंद्र मोदी ने बुधवार को विदेश नीति के अपने पहले मास्टर स्ट्रोक से सभी को चौंका दिया।
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मनोनीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नई पहल करते हुए 26 मई को होने वाले अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सहित सार्क देशों के सभी राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया है।

अपने इस कूटनीतिक दांव के जरिए मोदी ने भावी सरकार के एजेंडे में पड़ोसी देशों से संबंध सुधारने को प्रमुखता से रखने का संदेश दिया है। यह पहली बार है कि पीएम के शपथ ग्रहण समारोह में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को न्योता दिया गया है।
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दक्षिण एशियाई देशों में राजनीति हलचल शुरू

विदेश सचिव सुजाता सिंह की ओर से भेजे गए निमंत्रण के बाद दक्षिण एशियाई देशों की राजनीति में भी हलचल शुरू हो गई है।

श्रीलंकाई राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई, मालदीव, भूटान और नेपाल के राष्ट्राध्यक्षों की ओर से जहां समारोह में शामिल होने के संकेत दिए जा रहे हैं।

वहीं पाक पीएम नवाज और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना समारोह में शामिल होने के बारे में शिद्दत से विचार कर रहे हैं। चर्चा यह भी है कि शरीफ अपनी जगह राष्ट्रपति को तो हसीना अपने प्रतिनिधि को समारोह में शिरकत करने के लिए भेज सकती हैं।

उमर अब्दुल्ला ने भी की मोदी की तारीफ

कूटनीतिक विशेषज्ञों और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी नवाज को न्योता भेजे जाने पर मोदी की तारीफ की है।

दरअसल मोदी ने आम चुनाव के दौरान आतंकवाद, सीज फायर के लगातार उल्लंघन, सीमा पर तनातनी को लेकर पूर्ववर्ती सरकार के ढीले रुख पर हमला बोलने के साथ ही पाकिस्तानी नेतृत्व पर भी लगातार निशाना साधा था।

सूत्रों के मुताबिक मोदी ने शरीफ को निमंत्रण भेज कर अपनी ओर से संबंध सुधारने की पहल की है।

राष्ट्रपति ने द‌िखाई गर्मजोशी

मोदी के न्योते पर शरीफ के आने की अभी पुष्टि नहीं हुई पर वे नहीं आए तो भी पाकिस्तान की ओर से उनके प्रतिनिधि के रूप में कोई ऐसा व्यक्ति आएगा जिससे इस पहल का भविष्य में बड़ा आकार लेने की कोशिश का संकेत मिल सके।

सूत्रों के मुताबिक मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी इस बारे में अपनी इच्छा जताई थी। राष्ट्रपति ने मोदी की इस इच्छा पर अपनी गर्मजोशी दिखाई थी।

उधर भाजपा सूत्रों का कहना है कि भावी सरकार में भारत की विदेश नीति बड़ा करवट लेगी। इस बदलाव में हालांकि पश्चिम देशों को हमेशा से मिलती रही अहमियत कम नहीं होगी, मगर मोदी की पूरी कोशिश एशिया की शक्ति बनने और इसके लिए इससे जुड़े संगठन को लगातार मजबूती देने की होगी।

तारीफ के बाद उमर के तंज

ट्विटर पर उमर अब्दुल्ला ने मनोनीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में सार्क  नेताओं को निमंत्रण भेजने के फैसले का स्वागत है। विशेष तौर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बुलाया जाना बेहद सकारात्मक कदम है।

उम्मीद है कि पिछले कुछ समय से भारत-पाकिस्तान में रुकी वार्ता प्रक्रिया शुरू करने के लिए यह एक अच्छी पहल साबित होगी। अगर कहीं नरेंद्र मोदी की जगह राहुल गांधी होते और इस तरह का कदम उठाया गया होता तो इस पर भाजपा की न जाने क्या प्रतिक्रिया होती?
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ये तो नई सरकार का विशेषाधिकार है: कांग्रेस

कांग्रेस ने कहा है कि नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण में किसे बुलाना है, यह तय करने का विशेषाधिकार नई सरकार का है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह सब सरकार के कामकाज का हिस्सा है, इसमें हस्तक्षेप करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

कांग्रेस ने भाजपा सरकार के इस कदम पर कुछ भी कहने से इंकार कर द‌िया।
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