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अखबार बेचते हुए पास कर ली कैट की परीक्षा

Wed, 15 May 2013 02:53 PM IST
नई दिल्ली/ इंटरनेट डेस्क
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सुबह 4 बजे के अलार्म के साथ ही एन.शिव कुमार अपनी साइकल उठाकर अखबार बांटने निकल जाते हैं। सूरज के क्षितिज पर पहुंचने से पहले उसे यह सारे अखबार घरों में पहुंचा देने होते हैं।
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6वीं क्लास से शिव नारायण की जिंदगी इसी दिनचर्या पर चल रही है। लेकिन अब जल्द ही शिव की जिंदगी बदलने वाली है।

16 जून को शिव नारायण की एक नई जिंदगी शुरू हो रही है। अब वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से अपनी आगे की पढ़ाई करेंगे।

किसी कहानी जैसी है हकीकत

टाइम्स ऑफ इंडिया के वेंडर ने कैट 2012 पास करके आई.आई.एम की सीट हासिल कर ली है। 23 साल का शिव बांसवाड़ी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।

शिव के माता-पिता अनपढ़ हैं। पिता ट्रक ड्राइवर हैं। परिवार को कर्ज से मुक्त करने के लिए शिव ने यह काम करना शुरू किया था।

शिव ने कहा,"हर सुबह लोग मेरे पिताजी से पैसे मांगने आते हैं लेकिन वो जितना कमा पाते हैं उन पर उससे ज्यादा जिम्मेदारियां हैं।"

बंगलौर इंस्टीट्यूट में 8वें सेमेस्टर में पढ़ रहे शिव ने बताया,"जब मैं तीसरी या चौथी क्लास में था, मैं फूल बेचता था और मेरी मां बगीचों में काम करती थीं।"

पैसे मांग कर भरी थी फीस

शिव अपने स्कूल के समय से ही अखबार बांट रहा है। उसने बताया,"मैं आई.सी.एस.सी स्कूल में पढ़ता था। क्लास 9 में मुझसे कहा गया कि मैं जब तक स्कूल की फीस नहीं भर देता मुझे नहीं आने दिया जाएगा।
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अगले दिन मैं अपने पहले ग्राहक कृष्ण वेद व्यास के पास गया और उनसे पैसे मांगे। वे झिझके और उन्होंने कहा कि वे मुझे जानते भी नहीं हैं। मैंने उनसे कहा कि आप मेरे बारे में जानकारी ले लीजिए। उन्हें पता चला कि मैं टॉपर था। मैंने उनसे निवेदन किया कि वे मेरी एक टर्म की फीस भर दें लेकिन उन्होंने मेरी पूरे साल की फीस भर दी। मैं उनका बहुत एहसानमंद हूं।"

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान भी बांटे अखबार

10वीं क्लास में शिव को मौका मिला और अपनी एजेंसी खोल कर वह वेंडर बन गया। उसके बाद उसने बिजनेस की कई ट्रिक्स सीखीं लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के चार साल के दौरान भी वह अखबार बांटता रहा।

शिव ने कहा ,"मैं रोज सुबह 4 बजे उठता था। स्कूल समय पर जा सकूं इसलिए कभी नाश्ता नहीं करता था। कॉलेज में आने के बाद शुरू की क्लासेस में मैं पीछे बैठता था ताकि मैं कुछ घंटों की नींद ले सकूं।"

"अपने परिवार को संभालने के बाद मैं अपना चैरिटी इंस्टीट्यूट खोलना चाहता हूं। भारत के लोगों को पढ़ाना चाहता हूं। मैं यहां तक पहुंच सका क्योंकि किसी ने मेरी मदद की। इसीलिए मैं भी लोगों की मदद करना चाहता हूं। आगे की पढ़ाई के लिए शिव लोन ले रहा है।"
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