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क्या हिंदुत्व को बढ़ावा दे रहे हैं मोदी?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शैक्षिक सुधार कहीं हिंदुत्व को बढ़ावा तो नहीं हैं? यह आशंका जताई है एक अमेरिकी अखबार ने। अखबार ने अपने एक संपादकीय में आगाह करते हुए कहा है कि अगर ऐसी कोई कोशिश होती है तो यह देश के भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
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अखबार में कहा गया है कि मोदी ने भारतीय युवाओं से उनके सुनहरे भविष्य को लेकर वादा किया है। वह जानते हैं कि उनका यह वादा तभी पूरा होगा, जब 25 साल से कम उम्र की साठ करोड़ से अधिक की जनसंख्या की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और मौके दिए जाएंगे।

क्योंकि इनमें से ज्यादातर युवा ऐसे है, जिनमें बुनियादी शिक्षा और गणितीय कौशल का अभाव है। अपने 2014 के घोषणापत्र में मोदी की पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने शिक्षा को ‘राष्ट्र के विकास में सबसे ताकतवर उपकरण और गरीबी से लड़ने में सबसे उपयुक्त हथियार’ बताया था।
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मगर सवाल यह उठता है कि ये शैक्षिक सुधार देश में पढ़ी लिखी पीढ़ी और प्रशिक्षित श्रम बल तो तैयार करेंगे ही, साथ ही खास किस्म की विचारधारा को बढ़ावा भी तो नहीं देंगे।

बत्रा की किताबें शामिल हुई पाठ्यक्रम में

लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान मोदी ने सत्ता में आने पर राष्ट्रीय सुशासन के लिए गुजरात मॉडल लागू करने की बात की थी। मगर तब गुजरात मॉडल की बात बहुतों को कम अच्छी लगी थी।

इसी के तहत गुजरात राज्य के पाठ्यक्रम में शामिल कई किताबें खुद दीनानाथ बत्रा ने तैयार की थी, जो  भारतीय इतिहास के प्रति अपने दक्षिणपंथी नजरिए के लिए जाने जाते हैं।

फरवरी में बत्रा ने पेंगुइन इंडिया द्वारा प्रकाशित वेंडी डोनिगर की किताब की प्रतियां बाजार से वापस लेने का दबाव बनाया था, जिसमें वह सफल रहे थे। वेंडी शिकागो यूनिवर्सिटी की प्रोफसर रही हैं।

उन पर भारतीय धर्म और संस्कृति का अपमान करने के आरोप लगता रहा है। इसके बाद गुजरात की तत्कालीन सरकार ने जून में बत्रा की किताबों को राज्य के पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए थे।
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बत्रा को इतिहास लिखने की जिम्मेदारी

बत्रा की किताबों में सलाह दी गई है कि छात्र अपना जन्मदिन केक और कैंडल के साथ न मनाएं। बत्रा ने इसे गैर भारतीय परंपरा करार दिया है। सबसे खतरनाक यह है कि उन्होंने छात्रों को बृहत्तर भारत के रूप में एक ऐसे ‘अखंड भारत’ का नक्शा खींचने के निर्देश दिए हैं, जिनमें बांग्लादेश, श्रीलंका, तिब्बत, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान आते हैं।

बत्रा का यह भी मानना है कि विमान, ऑटोमोबाइल, और परमाणु हथियार प्राचीन भारत में पहले से ही मौजूद थे और वह चाहते हैं कि बच्चे इस तथाकथित तथ्य को याद रखें। 1999 में भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के दौरान बत्रा को इतिहास को फिर से लिखने की जिम्मेदारी दी गई, जिसमें ऐसे विचारों के साथ-साथ हिंदुत्व की भी झलक हो।

अब पार्टी के दोबारा सत्ता में आने के बाद से 2004 में छोड़े गए इस काम को फिर शुरू किया गया है। बत्रा ने कहा है कि उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने उन्हें भरोसा दिया है कि जल्द ही उनकी किताबों को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
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