सोशल मीडिया पर कॉमेंट को लेकर आईटी एक्ट की धारा 66 (ए) के तहत हुईं गिरफ्तारियों पर उठे विवाद के बाद सरकार ने एक नया गाइडलाइन जारी की हैं।
सरकार ने इस नई गाइडलाइंस में कहा है कि इस धारा के तहत गिरफ्तार करने से पहले ग्रामीण इलाकों में डीसीपी और मेट्रो शहरों में आईजी स्तर के अधिकारी की मंजूरी लेनी अनिवार्य होगी।
गौरतलब है कि पिछले दिनों शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे के निधन के बाद मुंबई बंद करने के विरोध में दो लड़कियों ने फेसबुक वॉल पर कमेंट कर दिया था। जिस पर 19 नवंबर को पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। इस पर पुलिस की चारों ओर आलोचना हुई। यही नहीं एमएनएस सुप्रीमो राज ठाकरे और महाराष्ट्र के लोगों के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक कॉमेंट पोस्ट करने वाले एक लड़के को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 'ग्रामीण इलाकों से संबंधित पुलिस अधिकारी डीसीपी रैंक और मेट्रो शहरों के पुलिस अफसर आईजी रैंक के अधिकारी की स्वीकृति के बिना आईटी एक्ट की धारा 66 (ए) के तहत रिपोर्ट नहीं लिख सकते हैं।'
क्या कहती है आईटी कानून की धारा (66) ए
॰ ईमेल के जरिए अपमानजनक संदेश भेजना।
॰ ऐसा कोई भी संदेश जो कि अपमानजनक और डरावना हो।
॰ ऐसी कोई गलत जानकारी जिससे अपमान हो, खतरा बढ़े या मुसीबत आए।
॰ संदेश से किसी को भी असुविधा हो।
॰ प्राप्तकर्ता के साथ धोखा हो या उसे भटकाया जाए।
धारा 66 (ए) के तहत जुर्म साबित होने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।