पांच राज्यों में होने वाले चुनाव और अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में वोट पुष्टि की रसीद निकालने वाली नई इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पूर्णतया प्रयोग में नहीं आएंगी।
आयोग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को यह सूचना देते हुए कहा कि हम नई ईवीएम को प्रयोग में लाना चाहते हैं। लेकिन दस लाख के करीब मशीनों के निर्माण की लागत 38 करोड़ रुपये आएगी और इसे बनाने वाली सिर्फ दो कंपनियां हैं।
ऐसे हालात में पूरी तरह से इन्हें आगामी चुनावों में प्रयोग में लाना संभव नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने आयोग से कहा है कि वोट पुष्टि की रसीद देने की व्यवस्था वह अपने संसाधनों के मुताबिक लागू करे।
नई ईवीएम को आयोग चरणबद्ध तरीके से प्रयोग में लागू कर सकता है। चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष निर्वाचन आयोग ने कहा कि नगालैंड में हुए उप-चुनाव में नई ईवीएम का प्रदर्शन अच्छा रहा है।
इसे भविष्य में प्रयोग में लाए जाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। तब पीठ ने आयोग से पूछा कि क्या पांच राज्यों के चुनाव में इसे प्रयोग में लाया जा सकेगा।
इस पर आयोग ने कहा कि यह संभव नहीं कि राज्यों के चुनाव में नई मशीन को पूरी तरह से प्रयोग में लाया जा सके। कुछ प्रदेशों में इस मशीन को प्रयोग में लाए जाने का प्रयास किया जाएगा।
आयोग के जवाब पर पीठ ने फिर सवाल किया क्या 2014 में होने वाले चुनाव में नई ईवीएम को प्रयोग में लाया जा सकेगा? इस पर आयोग ने कहा कि पूर्णतया प्रयोग में लाया जाना मुश्किल है। लेकिन कुछ प्रदेशों में इसकी व्यवस्था की जाएगी।
आयोग ने कहा कि पूरी तरीके से नई ईवीएम को चुनाव में प्रयोग में लाए जाने के लिए कुछ समय लगेगा। इसे चरणबद्ध और भौगोलिक आधार पर लागू किया जाएगा क्योंकि इसे लागू करने में बड़ा खर्च आना है जिसके बारे में सरकार के समक्ष मांगे रखी जाएंगी।
तब पीठ ने कहा कि इस संबंध में अदालत सरकार को निर्देश जारी करेगी कि आयोग की मांगों पर केंद्र जल्द विचार कर निपटारा करे।
गौरतलब है कि अदालत ने इस मसले पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है और आयोग को चरणबद्ध तरीके से नई ईवीएम को प्रयोग में लाने को कहा है।
ईवीएम मशीन में वोट पुष्टि की रसीद देने की मांग वाली याचिका भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की ओर से दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि वोट पुष्टि के बिना ईवीएम में गड़बड़ी किए जाने की आशंका है।