नेताजी सुभाषचंद बोस की अस्थियां मृत्यु के लगभग 68 सालों बाद गंगा में प्रवाहित की जाएंगी। जापान में रखीं इन अस्थियों को भारत लाने की तैयारी की जा रही है।
इंडो जापान संघ के अध्यक्ष बीएस देशमुख ने बताया कि नेताजी की अस्थियां जापान की राजधानी टोक्यो के रेंकोजी पगोडा में वर्ष 1945 से सहेज कर रखी गई हैं और मठाधीशों की तीन पीढ़ियां उनकी देखरेख करती आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि अस्थियों को भारत लाकर गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया जाएगा। देशमुख ने बताया कि वह दोनों देशों के राजनीतिज्ञों से मिलकर एक समिति का गठन करेंगे जो नेताजी की अस्थियों को भारत लाने का काम करेगी।
उन्होंने नेताजी की मौत से संबंधित गुत्थी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी तथा सुशील कुमार शिंदे जैसे नेतागण इस मठ का दौरा कर चुके हैं तो इसकी विश्वसनीयता पर संदेह करने का सवाल ही नहीं उठता।
उल्लेखनीय है कि नेताजी ने ब्रिटिश साम्राज्य के धुर विरोधी जापान की मदद से आजाद हिंद फौज का गठन किया था जिसमें धुरी राष्ट्रों द्वारा बंदी बनाए गए हिंदुस्तानी जवान शामिल थे। यह फौज अंग्रेजी हुकूमत को पूरी तरह से शिकस्त देने में तो नाकाम रही लेकिन इसने औपनिवेशिक दासता के विद्ध उठे भारतीय अवाम के संघर्षों में एक मील के पत्थर के रूप में अपना नाम दर्ज कराया।
नेताजी 18 अगस्त 1945 को जापानी वायुसेना के विमान से संभावित रूप से सोवियत संघ जा रहे थे कि यह बीच रास्ते में ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उनके जीवित होने के संबंध में कई विवादित दावे प्रचलन में हैं।