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नेता जी के भाई ने भी बनाई थी अंग्रेजों से विद्रोह की योजना

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस ने भी वर्ष 1941 में अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाई थी। जापानियों से सहायता मिलने की स्थिति में वे इसके लिए 50 हजार लोगों की फौज खड़ी करने को तैयार थे। बीते सप्ताह सार्वजनिक हुईं नेताजी से जुड़ी गोपनीय फाइलों से इस तथ्य का खुलासा हुआ है।
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इन फाइलों में शरत की ओर से कोलकाता के जापानी कॉन्सुलेट में चांसलर के तौर पर तैनात किसी मिस्टर ओहता के नाम लिखे एक पत्र की प्रति है। इसमें लिखा गया है कि वे जापान को खुफिया सूचनाएं मुहैया कराने के लिए एक संगठन की स्थापना कर सकते हैं।

उस समय द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान धुरी देशों के साथ ब्रिटिश सेना की अगुवाई वाले गठबंधन से लड़ रहा था। शरत ने 18 सितंबर, 1941 को उस पत्र में लिखा था, ‘10 हजार लोग तो तत्काल हथियार उठाने को तैयार हैं। धन और हथियार मिलने पर कुछ महीनों में यह तादाद बढ़ाकर 50 हजार तक पहुंचाई जा सकती है।
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कृपया यह बताएं कि हमें वांछित हथियार और पैसे कब तक मिल सकते हैं? यह काफी अहम और आवश्यक है।’ यह पत्र पुलिस की खुफिया शाखा के हाथ लगा था जो उस समय बोस परिवार की निगरानी कर रही थी।
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पत्र में किया था जिक्र

शरत ने उस जापानी अधिकारी से ‘एस’ को इस बारे में एक फौरी संदेश भी भेजने का अनुरोध किया था। समझा जाता है कि यहां ‘एस’ का मतलब शरत के भाई सुभाष चंद्र बोस से है।

16 जनवरी, 1941 को अपने कोलकाता स्थित आवास से नाटकीय तरीके से नेताजी के बचकर निकलने के कोई आठ महीने बाद लिखे उक्त पत्र में पूछा गया था कि क्या आपको ‘एस’ का कोई संदेश मिला है?

कृपया मुझे तमाम अहम सूचनाएं मुहैया कराएं. मसलन यूरोप में क्या हो रहा है और क्या सर्दियों में जर्मनी ईरान की ओर बढ़ेगा? बोस ने दावा किया था कि वे जापान को गोपनीय सूचनाएं मुहैया करा सकते हैं।

उन्होंने तीन महीने के लिए प्रायोगिक तौर पर इसकी पेशकश करते हुए शुरुआती खर्चों के तौर पर पांच हजार रुपये भेजने को कहा था।

गोपनीय फाइलों से साफ है कि देश की आजादी के बाद भी शरत की गतिविधियों की जासूसी वर्ष 1950 में उनके निधन तक जारी रही। पश्चिम बंगाल सरकार ने 20 सितंबर, 1948 को शरत बोस की निगरानी जारी रखने का नया आदेश दिया था।

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