नेपाल में 25 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकंप के 10 दिन बाद भी लगातार हल्के झटके आ रहे हैं। मंगलवार को भी रिक्टर पैमाने पर चार की तीव्रता के झटके महसूस किए गए।
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नेपाल के नेशनल सिस्मोलॉजिकल सेंटर के प्रमुख लोक विजया अधिकारी ने कहा कि सुबह 6:39 बजे सीमाई इलाके धाडिया में झटके महसूस किए गए। इसका केंद्र नुवाकोट जिले में था। उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल की आपदा के बाद से अब तक 143 झटके आ चुके हैं।
इस बीच विदेशी बचाव टीमों की ओर चलाए जा रहे अभियान को अपने हाथ में लेते हुए नेपाल सरकार ने मंगलवार को भूकंप प्रभावितों के पुनर्वास का काम शुरू कर दिया। इस आपदा में अब तक 41 भारतीयों सहित 7,611 लोगों की मौत हो चुकी है।
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बचाव अभियान में लगे भारत और 33 अन्य देशों की टीमों को स्वदेश लौटने के नेपाल सरकार के निर्देश के अगले दिन विभिन्न इलाकों में नेपाली सेना और पुलिस के 1,31,500 जवानों ने कमान संभाल ली। सरकार ने कहा कि इस कठिन काम में नेपाली जवानों को 100 से अधिक विदेशी टीमें सहयोग कर रही हैं।
विदेशी टीमें लौटी, पुनर्वास में जुटी नेपाली सेना
बचाव अभियान खत्म होने के बाद भारत की एनडीआरएफ सहित करीब 11 टीमों के 500 बचाव कर्मी अपने देश लौट गए हैं। बचाव कार्य में सबसे बड़ी विदेशी टीम लेकर पहुंची एनडीआरएफ ने मंगलवार को अपनी चार टीमें हवाई मार्ग से चंडीगढ़ भेज दी।
तीन अन्य टीमें काठमांडू से पटना के लिए रवाना हो गई हैं। बाकी की नौ टीमें एक दो-दिन में लौट जाएंगी। नेपाली सेना के प्रवक्ता जगदीश पोखरेल ने कहा कि कनाडा, बेल्जियम, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, तुर्की, पाकिस्तान, अमेरिका, नीदरलैंड्स, पोलैंड और भारत की टीमें लौट गई हैं।
विदेशी बचाव टीमें चरणबद्ध तरीके से लौटेंगी। उदाहरण के लिए करीब 158 एनडीआरएफ के जवान और 128 सिविलियन लौटे हैं और बाकी अभी देश में ही हैं। इसे योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाएगा। नेपाल में आई आपदा से राहत और बचाव में करीब 4500 विदेशी राहत कर्मी जुटे हुए थे।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि केवल बचाव टीमें नेपाल से लौट रही हैं। राहत कार्यों में जुटी भारत और अमेरिका की वायु सेना प्रभावित इलाकों में अपना काम कर रही है। इसी तरह विभिन्न देशों की मेडिकल टीमें भी दूरदराज के इलाके में अपनी सेवा दे रही है। कई देशों में अस्थायी अस्पतालों का निर्माण करवाया है और उनसे कम से कम दो सप्ताह रुकने को कहा गया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने सुषमा से की नेपाल त्रासदी पर चर्चा
अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने नेपाल में आई त्रासदी के बाद चलाए जा रहे राहत अभियानों और क्षेत्र की स्थिति के बारे में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को फोन कर चर्चा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि दोनों नेताओं ने नेपाल और क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की। भारत और अमेरिका दोनों नेपाल में राहत और बचाव अभियान में जुटे हुए हैं।
पशुपतिनाथ मंदिर घाट पर 533 भूकंप पीड़ितों का अंतिम संस्कार नेपाल में आई त्रासदी में मारे गए लोगों में से 533 शवों की अंत्येष्टि पशुपतिनाथ मंदिर के घाटों पर की गई है। इसमें नौ शव बच्चों के थे। उन्होंने बताया कि अब तक अधिकतर शवों की अंत्येष्टि की जा चुकी है। मंदिर के पदाधिकारी रीतेश कुमार ने बताया कि हर रोज पशुपतिनाथ के घाटों पर 82 शव जलाए जाते हैं, लेकिन आपाद के बाद एक दिन यहां 152 शव लाए गए।
पीएम कोइराला ने किया गोरखा जिले का दौरा नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने विनाशकारी भूकंप के 11 दिन बाद मंगलवार को गोरखा जिले के बारपाक इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया।
नेपाल में आए भूकंप का केंद्र बारपाक ही था। यात्रा के दौरान कोइराला ने भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से निबटने के लिए एक अलग मंत्रालय के गठन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सरकार राहत कार्यों और क्षतिग्रस्त घरों के पुनर्निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
भूकंप प्रभावित बच्चों में खसरे का खतरा : यूनिसेफ
यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि नेपाल में भूकंप के बाद खचाखच भरे राहत शिविरों में रह रहे पांच लाख से अधिक बच्चे खसरे के शिकार हो सकते हैं। इन शिविरों में न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त साफ-सफाई।
नेपाल में यूनिसेफ के प्रतिनिधि टोमू होजुमी ने कहा कि संक्रमण के कारण खसरा तेजी से फैलता है और यह खतरनाक हो सकता है। इसके तेजी से फैलने की चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इसी को देखते हुए पांच लाख से अधिक बच्चों को आपात टीकाकरण का लक्ष्य तय किया गया है।
भूकंप से पहले के आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में हर 10 में से एक बच्चे को खसरे का टीका नहीं लगा है। होजुमी ने कहा कि यूनीसेफ नेपाल को खसरा मुक्त करने के लिए एक दशक से अधिक समय से काम कर रहा है, लेकिन इस आपदा ने इस बीमारी के एक बार फिर फैलने की आशंका बढ़ा दी है।
भारतीय वायु सेना ने लानतंग इलाके में भूकंप में पूरी तरह तबाह एक गांव से स्पेन के नौ बचावकर्मियों और उनके दो कुत्तों को सुरक्षित निकाला है। इस गांव में भारी हिमपात होने वाला था, लेकिन इससे कुछ ही समय पहले वायु सेना ने उन्हें वहां से निकाल लिया।
नई दिल्ली में स्पेन के राजदूत गुस्तावो डी एरिस्टेगुई ने सोमवार को वायु सेना के टास्क फोर्स कमांडर एयर वाइस मार्शल उपकारजीत सिंह से मुलाकात कर उनसे अपने 17 नागरिकों को तलाशने में सहयोग करने को कहा था। इन नागरिकों की तलाश के लिए ही स्पेन से नौ सदस्यीय बचाव टीम आई थी। अभी तक स्पेनिश नागरिकों का कोई पता नहीं चला है।
वायु सेना के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें मंगलवार को स्पेनिश बचाव कर्मियों को बचाने का आपात अनुरोध प्राप्त हुआ। काफी कोशिश के बाद हवाई सर्वेक्षण के दौरान स्पेनिश बचाव टीम को देखा गया और उन्हें बचाने के लिए हेलीकॉप्टर की जोखिम भरी लैंडिंग करानी पड़ी। बचाव कर्मियों को निकालने के तुरंत बाद वहां भारी हिमपात हुआ।