पुलिस की लापरवाही से फरीदाबाद के एक परिवार को 21 वर्षीय बेटे की मिट्टी तक नसीब नहीं हो सकी। हजरत निजामुद्दीन जीआरपी ने शाहिद के शव को लावारिस मानकर अंतिम संस्कार कर दिया। तुगलकाबाद इलाके में 11 जनवरी को ट्रेन हादसे में युवक और उसके एक साथी की मौत हो गई थी।
पहचान न हो पाने की वजह से शाहिद के शव को दफनाने की बजाए जला दिया गया। पुलिस की कार्रवाई से खफा परिवार ने रविवार को संगम विहार थाने के पास सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। परिजन शाहिद की हत्या की आशंका भी जता रहे थे। पुलिस ने समझा-बुझाकर परिवार को भेजा।
परिवार ने बताया कि उन्होंने खुद ही दिल्ली पुलिस की साइट से शाहिद के शव को खोजा। पुलिस चाहती तो उसकी कमीज पर लगे लेबल से उसकी पहचान कर सकती थी। कमीज को शाहिद के चाचा ने ही सिला था। लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। शाहिद के भाई साजिद ने बताया कि वे परिवार के साथ संत नगर, ओल्ड फरीदाबाद में रहते हैं।
11 जनवरी को शाहिद अपने यहां काम करने वाले भानू (45) के साथ दुकान से निकला। तुगलकाबाद में दोनों ट्रेन से कट गए। पुलिस ने अगले दिन भानू की जेब से मिले कागज के आधार पर उसकी तो पहचान कर ली। लेकिन शाहिद की पहचान करने की कोशिश नहीं की गई। इधर परिजनों ने 13 जनवरी को संगम विहार थाने में शाहिद की गुमशुदगी दर्ज करा दी।
परिवार शाहिद की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाता रहा। शनिवार को परिवार को जिपनेट से शाहिद का पता चला। साजिद ने शाहिद की हत्या कर शव को रेलवे ट्रैक पर फेंकने का आरोप लगाया। दूसरी ओर लापरवाही पर दिल्ली पुलिस के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। अधिकारी जांच की बात कर रहे हैं।