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भाजपा ने कांग्रेस को दिया एक और झटका

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चुनाव में करारी हार झेलने वाली कांग्रेस को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद मिलने के आसार नहीं के बराबर हैं। सरकार ने कानून में बदलाव के आधार पर 16वीं लोकसभा में इस पद को रिक्त रखने का साफ संकेत दिया है।
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वर्ष 1952 के पहले आम चुनाव से लेकर अब तक 6 बार नेता प्रतिपक्ष का पद अनिवार्य 10 फीसदी सीटें हासिल न कर पाने के कारण रिक्त रहा है। अब सरकार पुरानी परिपाटी और कानून में बदलाव का हवाला देते हुए इस लोकसभा में भी इस पद को रिक्त रखने का साफ संकेत दे रही है।

संविधान विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे में जब इस बार विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी इसके लिए जरूरी 55 सीटें हासिल नहीं कर पाई है, तब यह पद उसे देना कानून सम्मत नहीं होगा।
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कांग्रेस को नहीं मिली है जरूरी सीटें

सरकार ने कांग्रेस को साफ संकेत दे दिया है कि उसका 16वीं लोकसभा में कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष का पद देने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि इससे पहले सरकार यह कहती रही थी कि इस मामले में वह कानूनी राय लेगी।

सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि काफी विचार विमर्श के बाद भाजपा नेतृत्व इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि इससे पहले कभी भी विपक्ष के नेता का पद दस फीसदी से कम संख्या वाले दल को नहीं दिया गया है। इसलिए इस परिपाटी में बदलाव की जरूरत नहीं है।

इस लोकसभा में सत्ता में आई भाजपा के बाद 44 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस है लेकिन कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा नेता प्रतिपक्ष का दर्जा हासिल करने के लिए सदन की कुल संख्या का दस प्रतिशत यानी 55 सीट से कम है। इसलिए परंपरा और कानून के हिसाब से कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

सरकार के इन संकेतों से जाहिर है कि वह मौजूदा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद खाली ही रखेगी। सरकार का इरादा लोक लेखा समिति (पीएसी) और डिप्टी स्पीकर का पद भी कांग्रेस के बदले किसी अन्य विपक्षी दल को देने का है। सरकार इस बहाने लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी अपने समर्थकों की संख्या बढ़ाना चाहती है। बीते दिनों सरकार ने डिप्टी स्पीकर का पद अन्नाद्रमुक को देने के संकेत दिए थे।
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मोदी नहीं करेंगे अपना दिल बड़ा?

लोकसभा में नेता विपक्ष का दर्जा कांग्रेस को नहीं देने के संबंध में लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप ने भी सरकार के रुख को उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि संविधान के मुताबिक इस बार कोई भी दल इस पद का हकदार नहीं है।

अगर सरकार इसके बावजूद यह पद कांग्रेस या किसी अन्य विपक्षी दल को देती है तो यह पूरी तरह से गैरकानूनी होगा। कश्यप ने बताया कि पहली से लेकर चौथी और सातवीं-आठवीं लोकसभा में भी किसी विपक्षी दल के पास जरूरी 10 फीसदी सीटें नहीं रहने के कारण सदन में विपक्ष का कोई आधिकारिक नेता नहीं रहा था।

मोदी सरकार इस परंपरा को जारी रखती है तो यह 7वां मौका होगा जब विपक्ष के पास नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं होगा।
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