अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी यूपीए सरकार ने गेमचेंजर योजनाओं को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है।
इस कड़ी में बुधवार को कैबिनेट ने लंबे इंतजार के बाद राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) को मंजूरी दे दी है।
एनआरएचएम के जरिये अपनी पहली ही पारी में ग्रामीणों पर डोरे डालने के बाद अब यूपीए सरकार की योजना एनयूएचएम के जरिये आठ करोड़ शहरी गरीबों को लुभाने की है।
इस योजना पर अगले पांच वर्षों में 22,507 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनमें केंद्र और राज्य के खर्च का अनुपात क्रमश: 75 और 25 फीसदी होगा। हालांकि उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में यह अनुपात 90 और 10 फीसदी रखा गया है।
इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में शहरी ग्रामीणों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 50 से 60 हजार की जनसंख्या पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), पांच से छह पीएचसी के ऊपर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएससी), दस हजार की जनसंख्या पर एक एएनएम और 200 से 500 की जनसंख्या पर एक सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता ‘आशा’ की व्यवस्था की जाएगी।
योजना में 50 हजार से ऊपर तक की जनसंख्या वाले 779 शहरों को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि इस योजना से नवजात शिशु और मातृत्व मृत्यु दर पर लगाम लगेगी। इसके अलावा शहरी गरीबों को हर तरह की चिकित्सा सुविधा मुफ्त में उपलब्ध होगी।