प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भले ही नारे स्वच्छ और निर्मल गंगा के गूंज रहे हों लेकिन हकीकत कुछ और ही है। गंगा में प्रदूषण की स्थिति यह है कि नदी में इंसान और जानवरों के लाशें तैरती दिखाई दे रही हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पेश की गई तस्वीरों पर गौर करने के बाद ग्रीन बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार की कथनी (नारों) और करनी (काम) में अंतर दिखाई दे है।
वाराणसी में गंगा के प्रदूषित होने पर केंद्र और यूपी प्रशासन की लापरवाही को लेकर ग्रीन बेंच ने दोनों को फटकार भी लगाई। बेंच ने कहा कि इस मामले पर जांच कर तत्काल कदम उठाइए। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।