तिग्मांशु धूलिया की फिल्म पान सिंह तोमर को 60 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ फिल्म घोषित किया गया।
फिल्म में एथलीट से डकैत बने पान सिंह तोमर का किरदार निभाने वाले अभिनेता इरफान खान के खाते में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का खिताब गया।
इरफान खान ने मराठी फिल्म ‘अनुमति’ के अभिनेता विक्रम गोखले के साथ यह पुरस्कार साझा किया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए 14 भाषाओं की 38 फिल्मों को चुना गया।
सर्वश्रेष्ठ मनोरंजक फिल्म की श्रेणी का पुरस्कार फिल्म विक्की डोनर के खाते में गया। इसी फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए अन्नू कपूर को सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता और डॉली अहलूवालिया को सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।
उषा जाधव को मराठी फिल्म ‘धाग’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री घोषित किया गया जबकि इस फिल्म के निर्देशक शिवाजी लोटन पाटिल को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक घोषित किया गया।
कमल हासन की विवादास्पद फिल्म ‘विश्वरूपम’ ने सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन डिजाइन का खिताब अपने नाम किया। इसी फिल्म के लिए पंडित बिरजू महाराज ने सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशक का पुरस्कार अपने नाम किया। विशेष ज्यूरी पुरस्कार श्रेणी में बॉलीवुड का दबदबा रहा।
इस श्रेणी में आमिर खान अभिनीत ‘तलाश’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘कहानी’ और ‘देख इंडियन सर्कस’ को बांग्ला फिल्म ‘चिद्रांगदा’ के साथ विजेता घोषित किया गया।
मुझे खुशी है कि गुमनामी में खोए पान सिंह तोमर का नाम इस फिल्म के जरिये हर घर में पहचाना जाने लगा। मैं इस पुरस्कार को उनके परिवार के साथ साझा करूंगा। मुझे यकीन है कि इस फिल्म से उन लोगों का मनोबल बढ़ेगा जो मानते हैं कि प्रतिभा को बेकार नहीं जाने दिया जाना चाहिए। हमारी युवा पीढ़ी काफी प्रतिभावान है उनकी प्रतिभा को पहचान जरूर मिलनी चाहिए।
---इरफान खान, अभिनेता
सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म- पान सिंह तोमर
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता - इरफान खान
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री - उषा जाधव (धाग)
सर्वश्रेष्ठ मनोरंजक फिल्म - विक्की डोनर
सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता - अन्नू कपूर (विक्की डोनर)
सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री- डॉली आहलूवालिया
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक - शिवाजी लोटन पाटिल (धाग)
सर्वश्रेष्ठ पटकथा - कहानी
असली नायक की कहानी
फिल्म पान सिंह तोमर का नायक असल जीवन में सात बार एथलीट का राष्ट्रीय चैंपियन और एक और देशप्रेमी सैनिक था। भ्रष्ट व्यवस्था के कारण पान सिंह तोमर को हथियार उठाकर एक बागी बनना पड़ा। समाज की मुख्यधारा से कटकर चंबल के बीहड़ों में आशियाना बनाने के बाद आखिरकार वर्ष 1984 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।