जिले के गांव बली में प्रेमी-युगल के कत्ल के करीब साढ़े चार साल पुराने मामले में कोर्ट ने हत्यारे बाप-बेटे को मौत की सजा सुनाई है। फांसी के अलावा उन पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। डबल मर्डर के तीसरे नाबालिग मुल्जिम का मामला किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है।
28 दिसंबर 2007 की रात को गांव की दलित बस्ती के खाली पड़े एक मकान में मैथलीशरण (66) ने बेटे हरेंद्र (27) और राहुल की सहायता से अविवाहित बेटी गीता और उसके घर के सामने रहने वाले विजय के शादीशुदा बेटे सुनील को बलकटी के ताबड़तोड़ वार कर मौत के घाट उतार दिया था। दोनों पक्ष गुर्जर बिरादरी से हैं। विजय की नामजद रिपोर्ट पर पुलिस ने कत्ल की रात ही मैथलीशरण और उसके बेटों हरेंद्र व राहुल को गिरफ्तार कर लिया था।
राहुल के नाबालिग होने की वजह से उसका केस किशोर न्याय बोर्ड में ट्रांसफर कर दिया गया था। मैथलीशरण और हरेंद्र पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की कोर्ट में मुकदमा चला। एडीजे प्रथम राजेंद्र बाबू ने गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर चार अगस्त को दोनों को हत्या का दोषी करार देते हुए फैसले के लिए सात अगस्त की तारीख मुकर्रर की।
एडीजीसी क्रिमिनल अजय शंकर शर्मा ने बताया कि न्यायाधीश राजेंद्र बाबू शर्मा ने ऑनर किलिंग पर सुप्रीमकोर्ट के फैसलों की रोशनी में मंगलवार दोपहर करीब डेढ़ बजे हत्यारे बाप-बेटे को सजा-ए-मौत सुनाई। 40 पन्नों के आदेश में दोनों पर 40-40 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। इसमें से आधी रकम मुद्दई को दी जाएगी। अर्थदंड न देने की सूरत में हत्यारों को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
कोई अफसोस नहीं
सजा सुनने के बाद मैथलीशरण और हरेंद्र मीडिया के सामने बहुत धीरे से बोले कि हमें कोई अफसोस नहीं। दूसरे बेटे राहुल ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
इंसाफ मिला, राहत मिली
मृतक सुनील के पिता विजय ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन था कि उन्हें इंसाफ मिलेगा। वे फैसले से संतुष्ट हैं। इन लोगों ने जितनी क्रूर घटना की थी, इनके लिए यही सजा होनी चाहिए थी।