भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन वे अभी से ही खुद को इस रूप में ढालने लगे हैं।
उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री के भाषण की तुलना अपने भाषण से करनी शुरू कर दी है। हालांकि इस टिप्पणी को कांग्रेस ने बकवास करार दिया है।
गुजरात के कच्छ जिले के भुज में युवाओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, 'जब हम यहां पर तिरंगा झंडा फहराएंगे, तो संदेश लाल किले तक भी जाएगा। पूरा देश यह जरूर जानना चाहेगा कि वहां क्या कहा जा रहा है और भुज में क्या कहा गया था। एक तरफ सिर्फ वादे ही वादे हैं जबकि दूसरी ओर लगातार काम किया जा रहा है। एक तरफ निराशा है, तो दूसरी ओर आशा।'
केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने दिल्ली में इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग उन्हें सुन रहे हैं, वह यह जानने के ज्यादा इच्छुक होंगे कि अब किस नए तथ्य को गलत ढंग से पेश करेंगे। उम्मीद है कि वह गलत बयानबाजी से राष्ट्रीय मुद्दों को तुच्छ नहीं बनाएंगे, हालांकि वह इसी के लिए जाने जाते हैं।
उन्होंने कहा कि जब भी वह बयान देते हैं, उसमें गलत आंकड़े, झूठे तथ्य होते हैं, जैसे चीन अपनी जीडीपी का 20 फीसदी शिक्षा पर खर्च करता है। संसदीय मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने मोदी को घमंड से चूर बताया।
शुक्ला ने कहा, 'मैं पहले दिन से ही कहता रहा हूं कि वह घमंड से चूर हैं। अगर ऐसा व्यक्ति राजनीति के सर्वोच्च पद पर काबिज हो गया, तो वह देश के साथ क्या करेगा, यह आसानी से समझा जा सकता है।'