गुजरात में हुए 2002 के दंगों में गुरुवार को मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अहमदाबाद कोर्ट ने क्लीन चिट देते हुए एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराया। इसके साथ ही मोदी को बड़ी राहत मिल गई।
कोर्ट के फैसले के बाद जहां भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने मोदी की तारीफों के पुल बांधे थे। लेकिन आज वो हुआ, जो अब तक नहीं हुआ। मोदी ने पहली बार गुजरात के दंगों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए दिल का दर्द उड़ेला।
शुक्रवार दोपहर मोदी ने अपने ब्लॉग के जरिए गुजरात दंगों पर अपनी बात कही, तो फिर पूरी तफ्सील से। आगे की स्लाइड में पढ़िए मोदी ने अपने ब्लॉग में क्या-क्या लिखा है?
'भूकंप और दंगों ने तोड़ दिया था मुझे'
नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि सच्चाई की जीत हुई है- सत्यमेव जयते। हमारी न्यायपालिका ने अपना फैसला सुना दिया है और ऐसे वक्त यह जरूरी हो जाता है कि मैं देश के साथ अपनी आंतरिक भावनाएं साझा करूं।
इस मामले के अंत ने शुरुआत की यादें ताजा कर दीं। 2001 के भीषण भूकंप ने गुजरात को मौत, तबाही और हताशा के काले अंधेरे में धकेल दिया था। सैकड़ों जानें गईं। लाखों लोग बेघर हो गए। जिंदगी तबाह हो गई। ऐसे भयानक हालात में मुझे लोगों को संभालने और जिंदगियां दोबारा बनाने का काम दिया गया। और हमने इस चुनौती को दिल से स्वीकार करते हुए पूरी शिद्दत के साथ काम शुरू किया।
लेकिन पांच महीने ही बीते थे, 2002 की भीषण हिंसा ने हमें हिलाकर रख दिया। निर्दोष लोग मारे गए। परिवार हताश थे। कई बरसों की मेहनत से खड़ी इमारतें ढह गईं। गुजरात अभी कुदरती आपदा से उभर ही रहा था कि इससे उसे एक और बड़ा झटका लगा।
मैं दुखी था, हताश थाः मोदी
मोदी ने इसमें लिखा है कि मैं भीतर तक दहल गया था। 'दुख', 'निराशा', 'हताशा', 'गम', 'गुस्सा' और 'वेदना'। ये अलफाज उस खालीपन को बयान नहीं कर सकते, जो हम लोगों ने उस अमानवीयता को देखकर महसूस की थी।
मोदी ने ब्लॉग में लिखा है, एक तरफ भूकंप के पीड़ितों का दुख था और दूसरी तरफ दंगों का शिकार हुए लोगों का। मैं बेहद मुश्किल हालात में फंसा था। मुझे ईश्वर से मिली सारी ताकत को एकाग्र कर अमन, न्याय और पुनर्वास में लगाना था, उस गम और गुस्से को भूलकर, जिससे मैं व्यक्तिगत रूप से निपट रहा था।
उन चुनौतीपूर्ण हालात में मैं शास्त्रों में लिखी ज्ञान की बातें याद कर रहा था, जिनमें उल्लेख किया गया है कि जो लोग तख्त पर बैठे हों, उन्हें अपना दुख-दर्द बांटने का अधिकार नहीं होता। उन्हें अकेलेपन के साथ इससे जूझना पड़ता है।
'सभ्य समाज में ऐसी घटनाओं की जगह नहीं'
मोदी ने ब्लॉग में कहा कि मैं भी इसी अनुभव से गुजरा। भीतर ही भीतर वेदना महसूस कर रहा था। वास्तव में, मैं जब कभी उन काले दिनों को याद करता हूं, तो मैं केवल ईश्वर से प्रार्थना कर पाता हूं। प्रार्थना करता हूं कि फिर कभी ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण दिन किसी व्यक्ति, समाज, राज्य या देश के सामने न आएं।
मैं पहली बार उन दिनों की अपनी दिक्कतों को आपसे साझा कर रहा हूं, जिनका सामना मैंने व्यक्गित स्तर पर किया था। हालांकि, इन्हीं भावनाओं को आधार बनाकर मैंने गुजरात के लोगों से उस रोज अपील की थी, जब गोधरा में ट्रेन जला दी गई थी। मैंने शांति और सौहार्द्र की अपील की, ताकि निर्दोष लोगों को कोई खतरा न हो।
मैंने फरवरी-मार्च, 2002 के उन बदकिस्मत दिनों में बार-बार मीडिया के सामने यही सिद्धांत रखे। शांति स्थापित करने, न्याय सुनिश्चित करने और हिंसा में शामिल लोगों को सजा दिलाने से जुड़ी सरकार की प्रतिबद्धता को सार्वजनिक रूप से सामने रखा। आपको सद्भावना उपवासों के दौरान भी इन्हीं भावनाओं को उड़ेलने वाले शब्द मिल जाएंगे, जहां मैंने जोर दिया कि इस तरह की घटनाएं सभ्य समाज में नहीं होती और इससे मुझे गहरा दुख पहुंचा है।
मेरे विरोधी जख्म कुरेदते हैं: मोदी
मोदी ने आगे लिखा है, मेरा जोर हमेशा एकता की भावना को बढ़ाने पर रहा है और इसी अवधारणा को मेरे 5 करोड़ गुजराती भाइयों और बहनों ने आगे बढ़ाया, जो मेरे मुख्यमंत्री काल के शुरू होने के साथ अपनाई गई थी। जैसे यही दुख-दर्द कम थे, जो मुझे अपने प्रिय भाई-बहनों की हत्या और हताशा का दोषी भी बताया गया।
आप कल्पना कर सकते हैं उस अंदरूनी दर्द की, जो मैंने महसूस किया क्योंकि उन घटनाओं का आरोप मुझ पर लगाया गया, जिनकी वजह से मैं खुद टूटा था। बीते कई साल से उन्होंने अपने हमले जारी रखे और कोई मौका नहीं छोड़ा। इससे भी ज्यादा दुख की बात यही थी कि अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक हित साधने के लिए वो मुझ पर हमला करने के चक्कर में इतना ज्यादा गिर गए कि मेरे राज्य और देश पर भी हमला करने लगे।
वे बेदर्दी के साथ उन जख्मों को कुरेदते रहे, जिन्हें हम गंभीर कोशिशों के साथ भर रहे हैं। संयोग से इस वजह से उन न्याय में भी देरी हुई, जिसके लिए लड़ने का दावा ये लोग कर रहे थे। उन्होंने शायद इस बारे में कभी नहीं सोचा कि पहले से दर्द झेल रहे लोगों को उन्होंने और कितना दुख दिया है।
'मैं आज खुश और संतुष्ट हूं'
मोदी ने ब्लॉग में लिखा - हालांकि, गुजरात ने अपनी राह चुन ली है। हमने हिंसा पर अमन चुना। हमने बांटने की राजनीति पर एकता को चुना। हमने नफरत के बजाय प्रेम चुना। यह आसान नहीं था, लेकिन हमें इसे लंबे वक्त तक लेकर चलने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। अनिश्चितता और डर वाली जिंदगी को गुजरात ने शांति, एकता और सद्भावना में बदल दिया है। मैं आज खुश और संतुष्ट हूं। और इसका श्रेय मैं हर गुजराती को देता हूं।
गुजरात सरकार ने देश में पहले हुए दंगों की तुलना में हिंसा को लेकर सबसे तेज और निर्णायक तरीके से प्रतिक्रिया दी। गुरुवार आया फैसला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई अभूतपूर्व जांच की प्रक्रिया का समापन है। गुजरात की 12 साल चली अग्निपरीक्षा अब अंत की ओर है। मैं आजाद हूं और सुकून महसूस कर रहा हूं।
मैं उन सभी का शुक्रगुजार हूं, जो इन कठिन परिस्थितियों में मेरे साथ खड़े रहे। भ्रम का बादल अब दूर हो रहा है, ऐसे मैं अब मुझे उम्मीद है कि जो लोग असली नरेंद्र मोदी को समझने और उनसे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वे खुद को कहीं ज्यादा मजबूत महसूस कर रहे होंगे।
'बंद करें गुजरातियों को बदनाम करना'
जिन लोगों को दूसरे के दुखों में संतुष्टि मिलती है, वे शायद अब भी मेरे खिलाफ जारी दुष्प्रचार नहीं थामेंगे। मैं उनसे कुछ उम्मीद भी नहीं करता। लेकिन मैं पूरी विनम्रता से प्रार्थना करता हूं कि वे कम से कम अब गुजरात के 6 करोड़ लोगों को बदनाम करने से बाज आएंगे।
दुख और वेदना के इस सफर से उभरने के बाद मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि मेरे दिन में कोई कड़वाहट न आए। मैं इस फैसले को व्यक्तिगत हार और जीत के रूप में नहीं देख रहा। और मैं अपने दोस्तों और खास तौर से अपने विरोधियों से भी यही आग्रह करता हूं।
सुप्रीम कोर्ट ने जब 2011 में इस संबंध में फैसला सुनाया था, तो भी मैं इसी सिद्धांत पर यकीन कर रहा था। मैंने सद्भावना के लिए 37 दिन व्रत किया। इस सकारात्मक फैसले को रचनात्मक कार्रवाई में बदला और समाज में एकता-सद्भावना पर जोर दिया।
मैं यह पूरी शिद्दत से मानता हूं कि किसी भी समाज, राज्य और देश का भविष्य सौहार्द्र में है। यही वह आधार है, जिस पर प्रगति और विकास खड़ा होता है। इसलिए, मैं सभी से इसके लिए काम करने के लिए हाथ मिलाने का आग्रह करता हूं, ताकि सभी चेहरों पर हंसी-खुशी दिखे।
एक बार फिर, सत्यमेव जयते!
वंदे मातरम
नरेंद्र मोदी