गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मिशन 2014 को गति देने के लिए पहला कदम बढ़ा दिया है।
कोलकाता पहुंचकर मोदी ने जिस तरह से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तारीफ की और ममता ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरह मोदी से मिली प्रशंसा को खारिज नहीं किया।
यह मोदी व भाजपा के लिए उम्मीद जगाने वाला है। माना जा रहा है कि इससे भाजपा के लिए भावी राजनीति की आशाएं जगेंगी।
मोदी अपने अभियान के तहत मंगलवार को कोलकाता में थे। हालांकि उनकी मंजिल अभी बहुत दूर है, लेकिन शुरुआती संकेत सकारात्मक मिले हैं। खासतौर पर ममता ने मोदी की किरकिरी नहीं होने दी।
कोलकाता में मोदी ने अपने रुख के अनुसार यूपीए सरकार पर जमकर हमला बोला लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तारीफ की।
दिल्ली में राज्य की वार्षिक योजना को योजना आयोग से हरी झंडी दिखाने दिल्ली आई ममता ने भी मोदी की प्रशंसा को स्वीकार कर लिया।
उन्होंने कहा कि यदि एक मुख्यमंत्री किसी दूसरे सीएम के कामकाज की तारीफ करता है तो इसमें राजनीति नहीं तलाशनी चाहिए। इसे सामान्य प्रशंसा के तौर पर ही लिया जाना चाहिए। ममता के इस बयान से भाजपा के लिए कुछ उम्मीद जगी है।
हालांकि पश्चिम बंगाल की राजनीति के चलते ममता के लिए मोदी के साथ खड़ा दिखना आसान नहीं है क्योंकि प्रदेश में 34 फीसदी अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हैं और ममता को वामपंथियों से लड़ने के लिए मोदी से दूरी बनाए रखना मजबूरी भी है।
इसके बावजूद उन्होंने मोदी को लेकर नीतीश कुमार की तरह तीखे तेवर नहीं दिखाए। दूसरी ओर भाजपा ने कहा है कि सवाल किसी की प्रशंसा का नहीं है, बल्कि मोदी ने गैर कांग्रेसी सरकारों के साथ यूपीए सरकार के सौतेले व्यवहार को आवाज दी है।
पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे को तबाह करने में जुटी है। केंद्र गैर कांग्रेसी सरकारों के साथ जो सौतेला व्यवहार कर रही है, उसे मोदी ने सच्चाई के साथ सामने रखा है।