चुनाव पूर्व सर्वेक्षण (ओपिनियन पोल) पर प्रतिबंध लगाने की कांग्रेस की मांग पर राजनीति गरमा गई है।
भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओपिनियल पोल को बैन करने की कांग्रेस की इस मांग को 'पूरी तरह से बचकाना' बताया है।
मोदी ने कहा कि गैर-लोकतांत्रिक कांग्रेस चुनाव सर्वेक्षण के साथ-साथ पोलिंग बूथ पर भी पाबंदी लगाना चाहती है।
मोदी ने अपने ब्लॉग में 'टुडे ओपिनियन पोल्स, व्हाट नेक्स्ट' शीर्षक से लिखा, 'कांग्रेस की यह मांग विध्वंसकारी है। कांग्रेस पोलिंग बूथ पर भी बैन चाहती है, क्योंकि ओपिनियन पोल का सबसे अधिक असर यहीं होता है।'
कांग्रेस ने ही थोपा था आपातकाल
मोदी ने लिखा, 'कल तो कांग्रेस चुनाव के दौरान लेख, संपादकीय और ब्लॉग पर भी बैन की मांग कर सकती है। यदि वह चुनाव हारती है तो फिर चुनाव आयोग को बैन करने की मांग करेगी। यदि अदालत उन्हें मदद नहीं करती तो फिर वे कह सकते हैं क्यों न कोर्ट पर भी पाबंदी लगा दी जाए। आखिर यह वही पार्टी है जिसने देश पर आपातकाल थोपा था।'
मोदी ने कहा, 'जिसने भी भारतीय इतिहास और कांग्रेस को परखा है उनके लिए यह मांग कतई आश्चर्यजनक नहीं है। यह कांग्रेस की फितरत है कि सत्ता में रहते हुए वह आम लोगों के अधिकार को कुचलना चाहती है।'
हालिया चुनाव सर्वेक्षणों के नतीजों को गलत ठहराने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इस पर रोक लगाने की मांग की थी। इस संबंध में चुनाव आयोग ने सभी पार्टियों से राय मांगी है।
भाजपा ने जताया विरोध
भाजपा ने इसका पुरजोर विरोध किया है। वहीं सपा और बसपा दोनों दल भी बैन के समर्थन में है तो वामपंथी दल प्रतिबंध के हक में नहीं हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसके प्रकाशन पर रोक के पक्ष में हैं।
दरअसल, विवाद की जड़ यह है कि अभी जितने भी सर्वेक्षण के नतीजे मीडिया में आए हैं, उनमें ज्यादातर में कांग्रेस को नुकसान में दिखाया गया है।