चुनावी साल में देश के ज्योतिषियों पर भी सियासी रंग चढ़ गया है। बुधवार को प्रगति मैदान के विश्व ज्योतिष मेले में ‘लोक सभा चुनाव 2104: ज्योतिष के आइने में’ विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया है।
करीब बीस ज्योतिषियों के साथ इसमें केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने भी शिरकत की।
ग्रह-नक्षत्रों की दशा के आधार पर ज्यादातर ज्योतिषियों ने प्रमुख राजनेताओं की कुंडलियों का आकलन कर माना कि भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी व राजनाथ सिंह के सितारे बुलंद हैं।
राहुल केजरीवाल की उम्मीदें कम
वहीं, लोगों में लोकप्रिय होने के बावजूद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से ज्यादा उम्मीद नहीं दिखती। इसके साथ ही ज्योतिषियों में भी एक राय इस पर भी दिखी कि इस बार देश को मजबूत नेतृत्व मिलने जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल की मौजूदगी में पूरी परिचर्चा हुई। आखिर में जायसवाल ने कहा कि आप सभी ज्योतिषी देश की दिशा और दशा दोनों तय करते हैं। आम लोगों तक वही जानकारियां पहुंचाइए, जिससे देश का भविष्य बेहतर हो।
मोदी का शनि प्रबल
ज्योतिषविद अरुण कुमार बंसल के मुताबिक, नरेंद्र मोदी के लग्न और राशि दोनों में साढ़े साती है। फिर चंद्र की दशा भी चल रही है और राहु पंचम भाव में है। यही नहीं, शनि भी प्रबल है। उन्होंने बताया कि अभी तक देश के ज्यादातर प्रधानमंत्री वही बने, जिनकी साढ़े साती चल रही थी।
इससे साफ लग रहा है कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन सकते हैं। वहीं, आभा बंसल ने बताया कि इसके साथ ही पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और खुद पार्टी की भी साढ़े साती चल रही है।
दूसरी तरफ जेपी शर्मा लाल धागे वाले का मानना है कि नरेंद्र मोदी पार्टी को बहुमत दिला देंगे, लेकिन संभव यह भी है कि गद्दी किसी महिला नेता को मिल जाए। नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी के बारे में कमोवेश यही राय सभी ज्योतिषियों की रही।
राहुल की साढ़े साती और केजरीवाल की अंतरदशा
दूसरी तरफ अजय बांबी ने बताया कि साढ़े साती राहुल गांधी की भी है, लेकिन यह सिर्फ राशि में है। लेकिन शनि नीच स्थान पर है। इससे साढ़े साती का असर खत्म हो जा रहा है। राहुल और उनकी पार्टी का इस बार गद्दी मुश्किल है।
इसके अलावा रमेश शास्त्री का कहना है कि अरविंद केजरीवाल का शनि नीच स्थान पर है। फिर भी लोकप्रियता इससे मिल रही है कि कुंडली के चौथे घर में चार ग्रह बैठे हैं। इससे उनकी कथनी-करनी पर फर्क पड़ जाता है। वह बोलते कुछ हैं और करते कुछ और हैं।
इतना ही नहीं, ग्रह-नक्षत्रों की चाल से ही उन्हें गुप्त योजनाएं बनाने में भी महारत हासिल है। लेकिन केजरीवाल के साथ दिक्कत इसलिए आएगी कि 18 मार्च से नीच शनि की अंतरदशा भी आ रही है। इससे वह विरोधी पार्टियों के चंगुल में फंस सकते हैं।
देश को मिलेगा मजबूत नेतृत्व
देश के बारे में शरद त्रिपाठी का कहना है कि 20 जून से देश के उच्च राशि में गुरु प्रवेश कर रहा है। इससे साफ है कि इस बार जो भी प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठेगा, देश को मजबूत और स्थायी नेतृत्व देगा। सियासी स्थिरता बीस जून के बाद ही आएगी।
अब देखना है कि मोदी को लेकर ज्योतिषियों की भविष्यवाणी सच साबित होगी या राहुल और केजरीवाल मार ले जाएंगे 2014 की बाजी। कौन काबिज होगा केंद्र की सत्ता में।