यूपीए सरकार के दौरान बेफिक्री और लापरवाही का सबब बने कांग्रेसी सांसदों की चुनाव में करारी हार को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी सांसदों को अनुशासन में बांधने की नई कसौटी तैयार कर रहे हैं।
ताजा कसौटी के तौर पर सांसदों का रिपोर्ट कार्ड है। सांसदों के कामकाज के मूल्यांकन को तय करने के लिए बाकायदा एक फार्म तैयार किया जा रहा है, जिसे सांसदों को भरना है। इसी के आधार पर सांसदों की काबिलियत और प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा।
विकास के मुद्दे को तरजीह
सूत्रों का कहना है कि चालू सत्र में सांसदों की उदासीनता को देखते हुए ये तरीका अपनाया गया है। ये फार्म राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों के सांसदों को दिया जाएगा।
पिछले हफ्ते ही प्रधानमंत्री ने उत्तरी राज्यों के पार्टी सांसदों को अपने आवास पर बुलाकर संसदीय कामकाज और भागीदारी देने का मंत्र देने के साथ ही विकास के मुद्दे को तरजीह देने का पाठ पढ़ाया था।
लोकसभा में भाजपा के 282 सांसद
पिछले हफ्ते संसद में बजट अनुपूरक मांगों के दौरान कई पार्टी सांसदों के लोकसभा से नदारद रहने पर पीएम ने अपनी नाखुशी जाहिर की थी। लोकसभा में भाजपा के 282 सांसद है।
सदन का कोरम और उपस्थिति कायम रखने की जिम्मेदारी सरकार की होती है। यूपीए सरकार के दौरान कांग्रेस सांसदों की सदन से लगातार गैर मौजूदगी को भी पार्टी की चुनाव में हार का बड़ा कारण माना जाता है।
सांसदों को हर माह भरना होगा फार्म
लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को हर महीने ये फार्म दिया जाएगा। इसमें उनसे पूछा जाएगा कि संसद सत्र में उन्होंने कितने सवाल पूछे। किस विषय पर सवाल पूछे। कितने मुद्दे उठाए। क्या मामले उठाए और कितने दिन सदन में उपस्थित रहे आदि।
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ही सांसदों का प्रमोशन तय करेंगे। ये रिपोर्ट कार्ड ही उनके मंत्री के तौर पर प्रमोशन के मौके बनाने में मदद साबित होगा।