गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर लगातार चौथी बार शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी अब अहमदाबाद से दिल्ली की दूरी को पाटने के काम में लग गए हैं। बुधवार को अपने शपथ ग्रहण समारोह में मोदी ने दिल्ली आने से पहले ही भविष्य की सियासत में अपनी धमक जमाने का अहसास दिला दिया।
सरदार पटेल स्टेडियम में मोदी के शो में यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अब हर क्षेत्र में उनकी स्वीकारोक्ति बढ़ गई है और भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने की दौड़ में वह अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। चुनाव जीतने की हैट्रिक लगा बृहस्पतिवार को दिल्ली आ रहे मोदी के बढ़ते सियासी कदमों पर उनके साथियों ही नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक विरोधियों की भी खास नजर रहेगी।
बुधवार को शपथ समारोह में मोदी से भले ही एनडीए के बड़े घटक दल जद-यू ने दूरी बनाई हो, मगर बाकी सहयोगी दलों ने जिस तरह अपनी बाहें मोदी की तरफ फैलाई है, उसे देखते हुए गुजरात के सीएम धीरे धीरे ही सही पर केंद्र की सियासत में आने की अपनी आगे की राह बनाते नजर आ रहे हैं।
इंडियन नेशनल लोकदल के ओम प्रकाश चौटाला, शिरोमणि अकाली दल के प्रकाश सिंह बादल, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता, महाराष्ट्र की रिपब्लिकन पार्टी के नेता रामदास अठावले, शिवसेना के उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे सरीखे क्षेत्रीय क्षत्रप मोदी की जीत के इस जश्न में उनके साथी बनते नजर आए।
दूसरी ओर, भाजपा के अंदर भी फिलहाल मोदी को लेकर सिर-फुटव्वल नजर नहीं आ रही है। उनके शो में भाजपा नेताओं का ऐसा जमघट लगा था कि शायद ही पार्टी का कोई दिग्गज बचा हो। साथ ही देश के नामी उद्योगपति भी उनकी जीत की इस खुशी में शामिल होने अहमदाबाद पहुंचे थे।
अपने इस शपथ ग्रहण समारोह से मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब हर क्षेत्र में उनकी स्वीकारोक्ति में इजाफा हो रहा है। साथ ही भाजपा की अग्रिम पंक्ति के नेताओं में से वह सबसे उभरते सितारे के तौर पर सामने आ रहे है।