राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया है। शपथ ग्रहण की तारीख 26 मई तय की गई है। ऐतिहासिक जीत के बाद नरेंद्र मोदी की दुनिया के कोने-कोने से बधाइयों के संदेश आ रहे हैं।
पड़ोसी मुल्कों ने भी नई सरकार के साथ सौहार्द्रपूर्ण संबंध रखने की बात कही। गुजरत दंगों के बाद अंतराष्ट्रीय राजनीति में अलग-थलग पड़े नरेंद्र मोदी एककाएक वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन चुके हैं। अंतराराष्ट्रीय मीडिया मोदी की राजनीति और विचारों को समझने की कोशिश कर रही है। मोदी को ध्यान में रखकर नई नीतियां तैयार की जा रही है।
चीन भी नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर गदगद है। चीनी थिंक टैंक ने मोदी की शान में कसीदे पढ़े हैं।
चीन ने मोदी को 'भारत का निक्सन' बताया
चीन सरकार के थिंक टैंक ने मोदी को 'भारत का निक्सन' बताया है, जो आने वाले समय में भारत और चीन के व्यापार में शानदार बढ़ोत्तरी का माध्यम बनेंगे।
चीनी थिंक टैंक का मानना है कि गवर्नेंस को लेकर मोदी की नीतियां चीनी नीतियों के बहुत करीब हैं। 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने कम्यूनिस्ट चीन की यात्रा की थी। सप्ताह भर की वह यात्रा दुनिया भर में 'ऐसा सप्ताह, जिसने दुनिया बदल दी' के रूप में जानी जाती है।
उस यात्रा का दुनिया की भौगोलिक राजनीति पर भी असर पड़ा था। चीन अमेरिका के करीब आया था और शीतयुद्घ में शक्ति संतुलन अमेरिका के पक्ष में हो गया था।
मोदी की शैली चीनी तरीकों के बहुत करीब
चीनी थिंक टैंक शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल प्रैक्टिसेज के विशेषज्ञ लिउ जॉन्गवी के मुताबिक,'भारतीय राजनीति में एक दंक्षिणपंथी नेता होने के कारण मोदी चीन के लिए 'भारत के निक्सन' साबित होंगे, जिनके कारण भारत और चीन के रिश्तों में मजबूती आएगी। मोदी का तौर-तरीका चीनी काम काज के तरीकों के बहुत करीब है।'
1970 के दशक में अमेरिका और चीन के रिश्तों का गतिरोध खत्म करने के कारण आज भी चीन में अमेरिकन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन का सम्मान किया जाता है। लिउ ने चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में लिखा कि मोदी भारत में विकास के लिए शांतिपूर्ण और स्थिर पड़ोस की अपेक्षा रखते हैं। वह भारत को स्वावलंबी और शक्तिशाली मुल्क बनाना चाहते हैं।
चीन का मानना, भाजपा बदल चुकी है
चीनी मीडिया के कुछ हिस्सों में मोदी को 'भारत का शिंजो अबे' कहा जा रहा है। लिउ ऐसी मान्यता का खंडन करते हैं।
उन्होंने कहा कि मोदी उकासावे से भरा कोई भी कार्य नहीं करंगे, ऐसी कार्यों से भारत की अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं होगा। गौरतलब है कि जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने कुछ क्षेत्रीय विवादों में चीन के खिलाफ कड़ा रवैया अपना रखा है, जिससे चीन और जापान की आपसी रिश्तों में तल्खी बढ़ी है।
हिंदुत्व के मुद्दे पर चीनी थिंक टैंक का मानना है कि भाजपा अब बदल चुकी है और उनका ध्यान अब विकास पर अधिक है।
मोदी तीन बार कर चुके हैं चीन की यात्रा
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी तीन बार चीन की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने अंतिम यात्रा सितंबर, 2011 में की थी।
उस यात्र में मोदी ने एक चीनी फर्म के साथ वड़ोदरा के नजदीक हाईवोल्टेज ट्रांसफार्मर और रिक्टर प्लांट स्थापित करने के लिए 400 करोड़ का समझौता किया था।
वहीं, चीन सरकार के एक और विशेषज्ञ हु सेंसांग ने हाल ही में कहा था कि सीमा के मुद्दे पर मोदी आक्रामक रुख अपना सकते हैं। चीनी मीडिया के भीतर मोदी को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रह है।