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क्या आपने पढ़ीं 5 बातें, जो मोदी ने पहली बार बताईं!

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भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी का कहना है कि गांधी परिवार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी है, क्योंकि उसे इस चुनाव में बेहद कम सीटें मिलने वाली हैं।
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उन्होंने कहा, "अब लड़ाई इस बात की है कि गांधी परिवार की प्रासंगिकता क्या है, जो अब तक कांग्रेस पार्टी के निर्विरोध नेता माने जाते थे। उनका लक्ष्य अब यह हे कि किसी तरह सौ का आंकड़ा पार किया जाए, ताकि उनके नेतृत्व को चुनौती न दी जा सके।"

मोदी ने कहा, "मुझे साफ दिख रहा है कि उनकी सौ से कम सीटें आएंगी और अगर ऐसा होता है, तो नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर बड़ा बवाल मच सकता है।"

'गांधी परिवार की ताकत खतरे में'

टीओआई को दिए इंटरव्यू में राहुल गांधी की जगह प्रियंका को सौंपने के सवाल पर नरेंद्र मोदी ने कहा, "चुनावी नतीजों के बाद इस बारे में कांग्रेस को फैसला करना है। हालांकि, यह कुछ अजीब है कि कांग्रेस जैसा राष्ट्रीय दल गांधी परिवार से परे कुछ नहीं देख पाता।"

अल्पसंख्यकों के उनसे दूर भागने के सवाल पर मोदी ने कहा कि कांग्रेस और कुछ राजनीतिक दल लोगों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि यह रणनीति कामयाब नहीं रहेगी।

मोदी ने स्नूपगेट पर कानून मंत्री कपिल सिब्बल को लपेटा। उन्होंने कहा कि सिब्बल अपने कानून ज्ञान का इस्तेमाल निजी और पार्टी हितों के लिए कर रहे हैं, न कि देशहित के लिए। और वो लंबे वक्‍त से उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

आर्थिक ग्रोथ पर क्या है मोदी की राय?

नरेंद्र मोदी ने कहा, "अगर सिब्बल की चलती, तो वो न केवल जज खोज लेते, बल्कि वो रिपोर्ट भी हासिल कर लेते, जिसे पाने के लिए वो इतना व्याकुल हो रहे हैं।"

तुलसीदास प्रजा‌पति केस में मोदी को 'संभावित संदिग्‍ध' बताने वाले सिब्बल के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा के पीएम पद के दावेदार ने कहा कि केवल सिब्बल इस तरह का जुमला फेंक सकते हैं, क्योंकि उन्हें किसी न किसी झूठे मामले में फंसाना उनकी पुरानी ख्वाहिश है।

उनके खिलाफ जारी सीबीआई जांच पर मोदी ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी को राजनीतिक असर से बाहर करना उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है। अर्थव्यवस्‍था पर उन्होंने कहा क‌ि देश को 'रोजगार की लड़ाई' के लिए तैयार होना चाहिए। उन्होंने कहा क‌ि ग्रोथ बनाम पर्यावरण की बहस पर साफ रुख चाहिए, ताकि नियमों का इस्तेमाल कर प्रोजेक्ट को लटकाया न जाए।

पाकिस्तान के साथ क्या करेंगे मोदी?

दूसरे मुल्कों से रिश्तों पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि पाकिस्तान के साथ ताल्लुकात तभी सुधर सकते हैं, जब वो अपनी सरजमीं से सक्रिय रहने वाले आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कडे़ कदम उठाए।

हालांकि, उन्होंने इस बात के संकेत भी दिए कि अगर सत्ता में आए, तो नरेंद्र मोदी अतीत को लेकर पाकिस्तान के साथ कोई तल्‍ख रुख दिखाने में यकीन नहीं दिखाएंगे।

उन्होंने कहा, "अगर वर्तमान हमारे सामने समाधान मुहैया कराने वाली नई तरह की संभावनाएं रखता है, तो हमें अतीत की घटनाओं को इसकी राह में अवरोध नहीं बनने देना चाहिए।"

चीन और अमेरिका के मामले में क्या कदम होंगे?

भाजपा के पीएम पद के दावेदार चीन को लेकर सकारात्मक दिखे। उन्होंने कहा कि दोनों मुल्कों के बीच द्विपक्षीय दिक्कतों का हल मुमकिन है और वो रिश्ते को अलग मुकाम पर ले जा सकते हैं।

उनसे जब अमेरिका के उन्हें वीजा न देने और द्विपक्षीय रिश्तों पर इसका असर पड़ने के बारे में पूछा गया, तो नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत-अमेरिका स्वाभाविक साझेदार हैं और किसी एक शख्स का मुद्दा रिश्तों को प्रभावित नहीं कर सकता।

अमेरिका ने 2005 में नरेंद्र मोदी को वीजा देने से इनकार कर दिया था। तभी से यह मामला हमेशा उठता रहा है। अब जब मोदी को लेकर बात हो रही है, तो वीजा मामला एक बार फिर गर्म हो गया है।

माओवाद-आतंकवाद पर क्या होगा रुख‍?

माओवाद और आतंकवाद की चुनौती पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यों को सबसे बड़ी आंतरिक खतरे को लेकर अपनी क्षमताएं बढ़ानी चाहिए और सभी विकल्प खुले रखने चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह अहम नहीं है कि वो लोग किन वजहों से हिंसा पर उतरे हैं, लेकिन जरूरी यह है‌ कि इस हिंसा को रोका कैसे जाए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी माओवाद को सबसे बड़ा खतरा बता चुके हैं।

मोदी ने कहा, "यह हमें फैसला करना है कि हम इन मुद्दों से किस तरह निपटना चाहते हैं। लेकिन हमारी प्रतिक्रिया के सामने यह अवरोध नहीं रहना चाहिए कि विकल्पों की कमी है।"

जीते तो कौन होगा कैबिनेट में?‍

जब नरेंद्र मोदी से पूछा गया ‌कि अगर सत्ता में आने का मौका मिला, तो उनके मंत्रिमंडल में किस-किस को जगह दी जाएगी। इस पर उन्होंने कहा, "यह प्रासंगिक सवाल है, लेकिन अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।"

भाजपा के पीएम पद के दावेदार दो सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनसे सवाल किया गया कि अगर वो दोनों सीटें जीतने में कामयाब रहते हैं, तो वाराणसी छोड़ेंगे या वडोदरा? इस पर उन्होंने कहा, "इस बात का फैसला पार्टी करेगी।"

गुजरात में मोदी की कार्यशैली मंत्रियों के बजाय नौकरशाहों के जरिए काम करने की रहती है, क्या केंद्र में जीते तो यहां भी उनका काम करने का अंदाज कुछ ऐसा ही होगा? इस पर उन्होंने सधा जवाब दिया।
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भाजपा जीती, तो नरेगा का क्या होगा?

नरेंद्र मोदी ने कहा, "जिम्मेदारी राजनीतिक शख्स की बनती है। भाजपा और उसके एनडीए सहयोगियों के पास ऐसे कई अनुभवी और दिग्गज लोग हैं, जो सरकार चला सकते हैं। हमें टीम के रूप में काम करना होगा।"

यह पूछने पर कि क्या एनडीए की सरकार बनी, तो नरेगा जैसे सामाजिक कार्यक्रम खत्म कर दिए जाएंगे, उन्होंने कहा, "हम नरेगा के प्रभावकारी क्रियान्वयन को लेकर प्रतिबद्ध हैं।"

मोदी ने कहा, "हालांकि, इसके खर्च और फायदों के पेशेवर तरीके से विश्लेषण की जरूरत है। हम सरकारी पैसे खर्च नहीं होने दे सकते, जब उससे कुछ खास फायदा न हो।"
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