गुजरात चुनाव के परिणामों को लेकर राजनीतिक दलों में बेचैनी अभी से महसूस की जाने लगी है। चुनावी माहौल में यहां हर बात की शुरुआत मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से हो रही है। चाहे ऑटो रिक्शा चालक हो या पॉश इलाके में रहनेवाले युवा हों, मोदी की जीत के लिए सभी आश्वस्त दिख रहे हैं।
मोदी एक बार फिर अपने अहमदाबाद स्थित मणिनगर विधानसभा क्षेत्र से किस्मत आजमा रहे हैं। मणिनगर विधानसभा क्षेत्र के लोगों का विश्वास है कि मोदी 13 दिसंबर यानी वोटिंग तक क्षेत्र में दौरा करें या नहीं, वह तीसरी बार भी राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे और 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री बन सकेंगे।
माहिर मोदी फिर से गुजरात, भाजपा और विकास की मार्केटिंग कर रहे हैं। पार्टियां और राजनीति विश्लेषक गुजरात चुनाव को आम चुनाव से जोड़ देख रहे हैं। फिलहाल भाजपा ने 84 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। जातिगत आधार पर इस क्षेत्र में ब्राह्मण, बनिये, सिंधी लोगों की बहुलता है। लोग यह मानकर चल रहे हैं कि मोदी के चुनाव जीतने पर न केवल मणिनगर राष्ट्रीय नक्शे पर स्थापित हो जाएगा बल्कि मणिनगर को मोदीनगर के रूप में पहचान मिलेगी।
सरकारी कर्मचारी योगेंद्र मेहता कहते हैं कि सब जानते हैं कि मोदी के इस सीट से जीतने या फिर से एक बार मुख्यमंत्री बनने का मतलब है दिल्ली पर मोदी का राज होना। कौन गुजराती यह नहीं चाहता है कि उनके बीच का कोई आदमी दिल्ली की कुर्सी तक पहुंचे। व्यापारी हंसमुख भाई टेकवानी बताते हैं कि सिंधी समुदाय के कुछ लोग किन्हीं मुद्दों पर मोदी से थोड़ी नाराजगी बनाए हुए हैं, लेकिन राजनीति में हर आदमी को राजी नहीं किया जा सकता है, और ऐसा करना जरूरी भी नहीं है।
जनता ने बताईं ये कमियां भी
- मुख्यमंत्री के रूप में अत्यधिक व्यस्त रहने से बतौर विधायक क्षेत्र पर कम ध्यान दे पा रहे हैं।
- नरोदा पाटिया में हुए दंगों को लेकर वहां की विधायक व मंत्री माया कोडनानी को सजा होने से सिंधी समुदाय थोड़ा नाराज बताया जाता है।
- आम लोगों का उनसे मिलना अपेक्षाकृत मुश्किल हो चला है।
- क्षेत्र में बेतरतीब यातायात, पानी की कमी और कुछ घोषणाओं का पूरा नहीं होना।