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नरेंद्र मोदी की टक्कर राहुल नहीं, अब प्रियंका से है!

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भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी को इस बात का अंदाजा रहा होगा कि जैसे-जैसे चुनाव का दौर बीतेगा, उन पर होने वाले हमलों की तादाद और तीखापन, दोनों बढ़ते जाएंगे।
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लेकिन उन्हें इस बात का इल्म शायद ही रहा हो कि जब मुकाबला अपने चरम पर पहुंचेगा, तो उनके सामने खड़ा दुश्मन अचानक बदल जाएगा और नया प्रतिस्पर्धी ज्यादा मजबूती के साथ चुनौती पेश करेगा।

देश की सियासत के सबसे दिलचस्प चुनाव जारी हैं और मोदी को पीएम बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही भाजपा के सामने दिलचस्प चुनौती। मुख्य विरोधी ने तरकश से वो तीर निकाल लिया है, जिस पर उससे सबसे ज्यादा यकीन है। मोदी के सामने अब राहुल गांधी नहीं, प्रियंका गांधी दिख रही हैं। कांग्रेस की रणनीति में आया यह बदलाव कुछ रणनीति का हिस्सा जान पड़ता है और कुछ मजबूरन। लेकिन दांव गजब का है।
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यूपी से प्रियंका का निशाना मोदी पर

लोकसभा चुनावों में खुद को अपने भाई राहुल की अमेठी की मां की रायबरेली सीट तक सीमित रखने वालीं प्रियंका गांधी ने इस बार भी कुछ अलग नहीं किया, लेकिन उनके भाषणों से साफ है कि जो हमले वाले इन दो इलाकों से बोल रही हैं, उनके निशाना कहीं और है।

शायद यह उनकी मजबूरी भी है। दरअसल, इन दिनों राहुल गांधी अकेले पड़ते दिख रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस की जिम्मेदारियों का ज्यादातर भार उनके कंधों पर है। इस बीच उनकी मां सोनिया गांधी की बीमारी ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

महाराष्ट्र दौरे से ठीक पहले तबीयत नासाज होने की वजह से सोनिया वहां नहीं जा सकीं, तो राहुल को इसकी भरपाई करनी पड़ी। लेकिन बात बनती नहीं दिख रही। स्‍थानीय नेता भी राहुल की तुलना में अपने यहां सोनिया गांधी को चाहते हैं। लेकिन उनकी बढ़ती उम्र और बीमारी दिक्कत पेश कर रही है।

वाड्रा पर बचाव छोड़कर, आक्रामक रुख

इस बीच प्रियंका गांधी सामने आई हैं। और पिछले दो दिन में जिस तरह से उन्होंने हमला बोला है, भाजपा भी सकपका गई होगी। भगवा दल उम्मीद कर रहा था कि हर बार की तरह इस बार भी प्रियंका केवल रायबरेली और अमेठी में वोट मांगेंगी, लेकिन उनके हमलों का निशाना पहले दिन से भाजपा आला कमान की तरफ है।

मंगलवार को उन्होंने अपने पति रॉबर्ट वाड्रा का बचाव किया। विदेशी अखबार में छपे लेख के आधार पर भाजपा 'जीजाजी' का मामला उठाकर कांग्रेस पर तंस कस रही है, ऐसे में प्रियंका ने पलटवार किया।

बात वाड्रा के बचाव तक सीमित रहती, तो भाजपा को ज्याद परेशानी नहीं थी। लेकिन अगले रोज गांधी परिवार के सबसे करिश्माई चेहरों में से एक ने बचाव छोड़कर हमलावर रुख अपनाया और भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी पर करारा हमला किया।

स्नूपगेट को लेकर ‌साधा निशाना

प्रियंका गांधी हमले करते वक्‍त नाम नहीं लेती, लेकिन उनकी बातों से साफ हो गया कि हमला किस पर है। उन्होंने कहा, "कुछ राजनीतिक दलों के नेता महिला सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं, लेकिन आपको उनसे पूछना चाहिए कि वो अपने घरों में महिलाओं की बात क्यों सुनते हैं?"

इशारा गुजरात के स्नूपगेट कांड की तरफ था, जिसमें एक महिला आर्किटेक्चर के सर्विलांस के लिए सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल का आरोप नरेंद्र मोदी और उनके करीबी अमित शाह पर है।

भाजपा को इस पर तुरंत सफाई पेश करनी पड़ी। जाहिर है, प्रियंका का तीर निशाने पर लगा। भाजपा ने कहा‌ कि युवती के पिता पहले ही सारी स्थिति साफ कर चुके हैं, ऐसे में यह मामला उठाने का कोई मतलब नहीं बनता।

क्या असर होगा प्रियंका का?

सियासत में आरोप सही हैं या गलत, यह ज्यादा मायने नहीं रखता। नजरिए की इस जंग में अगर कोई दिग्गज, दूसरे पर दमदार तरीके से आरोप लगाने में कामयाब रहा, तो आधी बात बन जाती है। राहुल ने इससे पहले भी स्नूपगेट का मामला उठाया है, लेकिन प्रियंका ने उठाया तो हमले की तीव्रता कुछ और थी।

प्रियंका ने मोदी पर आगे भी हमला बोला। उन्होंने कहा, "भाजपा का अभियान एक शख्स के इर्द-गिर्द बुना गया है और उन्हें सारी ताकत दी गई है। अगर एक व्यक्ति को सारी ताकत दी जाए, तो यह सही होगा या गलत? ताकत जनता के पास रहनी चाहिए।"

निजी हमलों पर उन्होंने कुछ यूं पलटवार किया, "यह असल राजनीति नहीं है। यह सब आपको बरगलाने के लिए किया जा रहा है। बात उन मुद्दों की होनी चाहिए, जिनका असर लोगों पर पड़ता है। यही असल राजनीति है। आपको फैसला करना है कि आप किसके साथ हैं।"

अकेले पड़ते दिख रहे थे राहुल

जाहिर है, राहुल और सोनिया प्रचार में अकेले पड़ते दिख रहे थे, क्योंकि पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता और मंत्री रैलियों को संबोधित करने से बच रहे हैं। कई दिग्गज हारने के डर से चुनाव तक नहीं लड़ रहे। ऐसे में प्रियंका की सक्रिय भूमिका कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में हवा भर सकती है।

सोनिया के अचानक बीमार पड़ने से मीडिया की जो निगाह कांग्रेस से हटकर मोदी और अरविंद केजरीवाल पर टिक गई थी, वो प्रियंका के कारण दोबारा लौट आई। जिस वक्‍त केजरीवाल बनारस में पर्चा भरने से पहले रोड शो कर रहे थे, टीवी चैनलों पर प्रियंका की चुनावी सभा दिखाई जा रही थी।

कांग्रेस में लंबे वक्‍त से मांग उठती रही क‌ि प्रियंका को सक्रिय राजनीति में उतरना चाहिए। इस बार भी खबर आई थी कि वो मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन कांग्रेस ने इसकी इजाजत नहीं दी। हालांकि, बाद में उन्होंने साफ कि किया अगर वो लड़ना चाहेंगी, तो परिवार का पूरा साथ उन्हें मिलेगा।
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वाड्रा का बचाव इसलिए जरूरी

सवाल यह भी उठता है कि प्रियंका ने खुद वाड्रा का बचाव क्यों किया? दरअसल, कांग्रेस इस बात को लेकर चिंतित है कि भाजपा वाड्रा को लेकर जो हमले कर रही है, उसका नुकसान उसे चुनावों में हो सकता है।

भाजपा वाड्रा पर इल्जाम लगा रही है, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। लेकिन मोदी के राजनीतिक द्वेष की भावना से कोई काम न करने का आश्वासन देने के बावजूद भाजपा के कई नेता कह चुके हैं क‌ि अगर वो सत्ता में आए, तो इस पर कार्रवाई होगी।

जाहिर है, वाड्रा चुनावों के दौरान और उसके बाद कांग्रेस की मुश्किल बन सकते हैं, ऐसे में इन हमलों को लेकर बचाव का रुख छोड़कर आक्रामक अंदाज में आना जरूरी था। प्रियंका ने कहा, "मुझ पर जितने निजी हमले किए जाएंगे, हम उतना मजबूत बनकर सामने आएंगे।"
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