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मोदी जी, सिर पर इतने बाल कहां से आए?

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हो सकता है कि आपको अटपटा लगे लेकिन ये सच है। फिल्मी सितारों और सेलेब्रिटीज की तरह नरेंद्र मोदी भी अपने लगभग गंजे हो चुके सिर पर हेयर ट्रांसप्लांट करवाते हैं। इसे आम बोलचाल में सर्जरी ही कहते हैं, यानी सुंदर या सजीला दिखने के लिए शरीर के किसी हिस्से को क्लिनिकल मदद से संवारना।
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मोदी ने पहली बार नहीं बल्कि कई बार हेयर ट्रांसप्लांट करवाया है। 2010 के बाद उन्होंने 2012 में भी हेयर ट्रांसप्लांट करवाया था जिसका असर चुनाव प्रचार के दौरान देखने को मिल रहा है।

दरअसल प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर देश भर में लगे मोदी के कट आउट और प्रचार सामग्री में दिखने वाला मोदी का चेहरा उड़े बालों में न दिखे इसके लिए उनका हेयर ट्रांसप्लांट करवाया गया है। प्रचार और प्रसार में हजारों करोड़ रुपया खर्च करने वाली पार्टी ने तय किया था कि जनता उड़े बाल वाले मोदी को न देखे।
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फोटो में देख लीजिए असली फर्क

मोदी के करीबी कहते हैं कि गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले मोदी घूमने फिरने के अलावा खुद को फिट रखने के भी शौकीन थे। इसलिए वो हर जगह अपने साथ एक कंघी और शेविंग किट लेकर घूमते थे।

उनकी जेब में हर समय कंघी रहती थी जिससे समय समय पर वो बाल संवारा करते थे। लेकिन वक्त के साथ उड़ते बालों ने मोदी की जेब से कंघी गायब कर दी।

2007 से पहले के मोदी आगे से गंजे दिखते थे लेकिन 2011 के आस पास उनकी चांद पर बाल नजर आने लगे। आप फोटो में भी देख सकते हैं। इस फोटो में मोदी के सिर पर बालों का फर्क साफ दिखाई दे रहा है। पहली फोटो 2009से पहले की है और दूसरी फोटो 2010 के बाद की है।

जाहिर तौर पर जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी को विकास के मॉडल के रूप में प्रोजेक्ट करना शुरू किया तो मोदी को अपने रूप और ‌रंग पर खास ध्यान देने की जरूरत महसूस हुई।

क्या है बाल बढाने की वजह

गौर करें तो महसूस होता है कि पिछली बार की तुलना में मोदी के पीछे के बाल कुछ ज्यादा ही लंबे हो रहे हैं। इतने क‌ि पोनी टेल तक बना ली जाए। क्या यह कोई टोटका है?

कुछ लोग मान रहे हैं कि मोदी ने पीएम बनने के बाद अपने बाल किसी मंदिर में दान देने की बात कही है। वहीं कुछ लोगों का सोचना है कि मोदी लंबे बालों के जरिए अपनी छवि एक उदार व्यक्तित्व के तौर पर बनाना चाह रहे हैं।

एनर्जी के लिए क्या करते हैं मोदी

मोदी की एनर्जी भी आजकल देश में चर्चा का विषय बन गई है। एक दिन में दर्जनों रैलियां और दिन भर में कई सौ किलोमीटर का सफर भी उनके चेहरे पर शिकन या थकान नहीं लाता। दरअसल मोदी की मैनेजमेंट टीम ने तय कर रखा है कि मोदी को क्या और कितना खाना है।
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काम ही काम, आराम कब करेंगे

इसी के अनुसार उनके आराम के घंटे काम, मनन और पार्टी बैठक का समय निश्चित है। मोदी को ज्यादा थकाऊ सफर न करना पड़े इसके चलते उनके लिए तमाम तरह की सुविधाओँ वाले तीन हैलीकॉप्टर हैं।

मोदी इस समय चुनाव प्रचार के साथ साथ गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर जो जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उसके लिए भी मैनेजमेंट टीम काम करती है।
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