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मोदी-पासवान कर सकते हैं गठबंधन का ऐलान

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गुजरात दंगा मामले में नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल खड़ा कर अलग रास्ता चुनने वाले लोजपा नेता रामविलास पासवान एक बार फिर राजग का दामन थामने को तैयार हैं।
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भाजपा और लोजपा के बीच बिहार में सीटों के बंटवारे पर करीब-करीब सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि बृहस्पतिवार को मोदी और पासवान संयुक्त रूप से गठबंधन का ऐलान करेंगे।

लोजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी की राजग में वापसी की पटकथा पर लगभग मुहर लग चुकी है। फिलहाल भाजपा लोजपा को छह सीटें देने पर राजी है, जबकि लोजपा की मांग 8 सीटों की है।
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भाजपा ने लोजपा को 7 सीटें देकर गठबंधन पर अंतिम मुहर लगाने के संकेत दिए हैं।

बिहार में बदले राजनीतिक समीकरण

इस भावी गठबंधन से बिहार में बदले राजनीतिक समीकरण में अब राजद एनसीपी और कांग्रेस से तालमेल करेगी।

राजद ने राज्य की 40 सीटों में से 12 सीटें कांग्रेस को तो एक सीट एनसीपी को देने का नया फार्मूला तैयार किया है। राजद के मुखिया इस फार्मूले पर कांग्रेस नेतृत्व से बातचीत कर गठबंधन की औपचारिक घोषणा जल्द से जल्द करने का दबाव बनाएंगे।

लोजपा सूत्रों के मुताबिक फिलहाल भाजपा ने लोजपा को जमुई, वैशाली, हाजीपुर, समस्तीपुर, सासाराम और खगड़िया सीट देने पर सहमति जताई है। लोजपा इसके अतिरिक्त अररिया और औरंगाबाद सीट भी चाहती है।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी लोजपा को अररिया सीट तो नहीं देगी। औरंगाबाद सीट देने के लिए यहां से जदयू के बागी सांसद सुशील कुमार सिंह को लोजपा से टिकट देने की शर्त रखेगी।

चिराग की रही अहम भूमिका

अगर लोजपा और भाजपा साथ आते हैं तो इसका श्रेय रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान को जाएगा। चिराग भाजपा की ओर से मोदी के पीएम पद का उम्मीदवार तय होते ही अपने पिता को राजग के साथ जाने के लिए मना रहे थे।

इस बीच कांग्रेस और राजद से मनमाफिक सीट मिलने में हासिल हुई निराशा ने पासवान को बेटे की बात मानने पर मजबूर कर दिया। चिराग जमुई से चुनाव लड़कर अपनी संसदीय राजनीतिक पारी की शुरुआत करना चाहते हैं।

पासवान से सीबीआई कर सकती है पूछताछ

सीबीआई बोकारो स्टील प्लांट में हुई कुछ नियुक्तियों के मामले में लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान से पूछताछ कर सकती है। इन नियुक्तियों की प्रक्रिया में ग़ड़बड़ी के आरोप हैं। गलत ढंग से नियुक्ति के सिलसिले में कुछ हाईप्रोफाइल लोगों के रिश्तेदार एजेंसी की जांच के दायरे में हैं।

बिहार में लोकसभा सीटों के बंटवारे को लेकर सौदेबाजी में लगे पासवान के लिए यह झटका हो सकता है। सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसी को कुछ ऐसे दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनसे नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान कुछ उम्मीदवारों को उनके स्टाफ की तरफदारी हासिल होने की आशंका है।

सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्री की अनुमति के बगैर निचले स्तर का कर्मचारी इस तरह की तरफदारी नहीं कर सकता है। एजेंसी पासवान से इस संबंध में पूछताछ कर सकती है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह फैसला लिया जाएगा कि पासवान से कब पूछताछ होगी।
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यूपीए सरकार में मंत्री थे पासवान

सूत्रों के मुताबिक जिन लोगों की नियुक्ति हुई है, उनके दस्तावेजों पर पासवान के आधिकारिक पते 12, जनपथ की सील लगी है। इसके साथ ही उनके स्टाफ की सिफारिशी चिट्ठियां भी हैं। इनमें उन लोगों के नाम हैं, जिन्हें बोकारो स्टील प्लांट में नियुक्त किया जाना था।

गौरतलब है कि पासवान 2004 से 2009 के बीच यूपीए सरकार में रसायन, खाद और इस्पात मंत्री थे। बोकारो स्टील प्लांट में कथित तौर पर ये फर्जी नियुक्तियां उनके कार्यकाल में ही हुई थीं।
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