प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न्यूयॉर्क दौरा इस बार कई मायनों में खास रहने वाला है। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ रहे तनाव के बीच दोनों देशों के सर्वोच्च नेता अमेरिका में एक ही होटल में ठहरेंगे।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र आम सभा की बैठक में भाग लेने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी 23 सितंबर को न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ दो दिन बाद 25 सितंबर को न्यूयॉर्क पहुंचेंगे। इस दौरान दोनों नेता एक ही होटल में रुकेंगे।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक न्यूयॉर्क दौरे के दौरान हालांकि कोई भी द्विपक्षीय बैठक निर्धारित नहीं है लेकिन फिर भी मोदी और शरीफ के बीच बातचीत की संभावना है।
जब आमने-सामने होंगे मोदी और शरीफ
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर होटल के अंदर पीएम मोदी और शरीफ की मुलाकात होती है तो वो सिर्फ एक सामान्य दुआ-सलाम होगी।
अधिकारियों के मुताबिक अगर ऐन मौके पर दोनों देशों के नेताओं के बीच कोई बैठक निर्धारित की जाती है तो इसका मतलब यह होगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हो सकती है।
उन्होंने बताया कि अगर दोनों देशों के बीच बातचीत होती है तो यह संयुक्त राष्ट्र आम सभा की बैठक में उन महत्वपूर्ण मुद्दों पर असर डाल सकती है, जिन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच टकराव है।
अमेरिका को भी उम्मीद, बातचीत होगी
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ की मुलाकात होने की संभावना के बीच अमेरिका ने भी दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू होने की उम्मीद जताई है।
न्यूयॉर्क में दोनों नेताओं के बीच वार्ता को लेकर अमेरिका ने कहा है कि ये दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों पर निर्भर करता है कि वह कहां वार्ता करना चाहते हैं। अमेरिका उन्हें इस मामले में कुछ नहीं कह सकता।
दक्षिण और केंद्रीय एशिया की अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री निशा देसाई बिस्वाल ने भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता बहाल करने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, ‘दोनों देशों के बीच वार्ता होनी चाहिए। फिर यह चाहे यूएन की बैठक के समय हो या कभी और, हम इसका स्वागत करेंगे।
बिस्वाल ने कहा कि वार्ता का समय और जगह तय करना दोनों देशों पर है। इसमें अमेरिका कुछ नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा से दोनों देशों के बीच वार्ता की पहल का समर्थक रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान की धरती से पनप रहे आतंक को लेकर सहायक विदेश मंत्री ने कहा कि आतंक का दंश भारत ही नहीं, अमेरिका ने भी झेला है और पाकिस्तान भी इससे अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि पाक को अच्छे और बुरे आतंकवाद में फर्क करना छोड़ना होगा और आतंकवाद को मिटाने के लिए और कड़े प्रयास करने होंगे।