प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अफसरों को राज्यों के विकास और समस्याओं से संबंधित मुद्दों पर प्राथमिकता से विचार करने का फरमान दिया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जुड़े अधिकारियों की पहली बैठक में मोदी ने अधिकारियों को गुरुमंत्र दिया कि वे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर खर्चा घटाने की दिशा में काम शुरू करें।
साथ ही अफसरों को बंद कमरों से बाहर निकल कर जनता की आवाज सुनने के निर्देश दिए गए हैं।
जनता दरबार लगाने और हर मंत्रालय में एक अधिकारी लोगों की समस्या सुनने के लिए तैनात करने की भी बात प्रधानमंत्री ने अफसरों से कही है। अफसरों से कहा गया है कि हर मंत्रालय में एक अधिकारी होना चाहिए जो एक दिन लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका निपटारा करें।
फिजूल खर्ची से बचें मंत्री
इससे पहले मंगलवार को मोदी ने अपने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में मंत्रियों से कहा था कि वे बंगलों और दफ्तरों पर ज्यादा धन खर्च न करें।
प्रधानमंत्री मोदी ने शपथ लेने के दूसरे दिन ही अपने अधिकारियों को गुरुमंत्र देना शुरू कर दिया है। राज्यों के मुद्दों को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। दरअसल, मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान भी राज्यों को सबसे ज्यादा तवज्जो देने का वादा किया था।
बुधवार को बैठक के दौरान मोदी ने अपने इसी एजेंडे पर आगे बढ़ने की कोशिश की। उन्होंने अपने अधिकारियों को तकनीक बढ़ाओ और खर्च घटाओ का मंत्र दिया। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि लोगों की समस्याओं का समाधान तेजी से होना चाहिए।
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि उन्होंने आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। ऐसी व्यवस्था और प्रक्रियाएं बनाने को कहा, जिनसे समस्याओं का समाधान और निगरानी प्रभावशाली तरीके से हो सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों के विकास को प्राथमिकता बनाया जाए। उनके मामलों को संवेदनशीलता से देखा जाए क्योंकि इससे ही हमारा संघीय ढांचा मजबूत होगा। मोदी ने अपने सभी विभागों के अधिकारियों से सुझाव देने के लिए कहा है।
साथ ही उन्होंने पीएमओ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी मंत्रालयों के अधिकारियों को जनता दरबार लगाने के लिए कहें ताकि जनता की शिकायतें सुनी जा सकें। उन्होंने कहा कि शिकायतों की सुनवाई और निपटारे के लिए दिन और समय तय करने को कहा।