राजीव गांधी हत्याकांड की जांच करने वाले सीबीआई के एक पूर्व अधिकारी ने दावा किया है कि श्रीपेरुंबुदूर में आमसभा में हत्यारी धानु को दिखाने वाले वीडियो को तत्कालीन आईबी प्रमुख एमके नारायणन ने दबा दिया था। नारायणन वर्तमान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं।
तत्कालीन मुख्य जांच अधिकारी के रागोथमन ने अपनी हालिया किताब ‘कांसपिरेसी टू किल राजीव गांधी-फ्रॉम सीबीआई फाइल्स’ में कहा है कि इस संदर्भ में नारायणन द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को लिखे पत्र में वीडियो का जिक्र है। लेकिन इसे कभी भी विशेष जांच दल के संज्ञान में नहीं लाया गया।
राजीव हत्याकांड की जांच के लिए गठित जस्टिस वर्मा आयोग के जिक्र के बाद एसआईटी को वीडियो के बारे में पता चला। इस बारे में नारायणन टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। कोलकाता में राजभवन के सूत्रों ने कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया गए हुए हैं।
रैली के आयोजकों ने उस दिन की आमसभा की वीडियोग्राफी एक स्थानीय वीडियोग्राफर से कराई थी। किताब के परिशिष्ट में प्रकाशित नारायणन के पत्र में कहा गया है कि बैठक स्थल पर बैरीकेडिंग कमजोर थी। इसलिए लोगों का विशेष क्षेत्र में पहुंचना संभव था।
हालांकि यह साफ नहीं हो सका कि राजीव गांधी के घटनास्थल पर पहुंचने पर धानु वहां पहुंची या वह पहले से ही वहां मौजूद थी। नारायणन के पत्र में कहा गया है कि बैठक के इस हिस्से के वीडियो की फिलहाल स्क्रीनिंग कर महिला की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। रागोथमन ने कहा कि यह उनकी ओर से सुइसाइड नोट था।
अगर उन्होंने यह नहीं लिखा होता तो इसके बारे में पता नहीं चलता। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी के तत्कालीन प्रमुख डी. आर. कार्तिकेयन ने मामले को तूल नहीं दिया और नारायणन बच निकले। इन आरोपों पर कार्तिकेयन ने कहा कि टिप्पणी करने से पहले वह किताब को पढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि 22 वर्ष पहले की घटना है और देश एवं दुनिया के अखबारों, पत्रिकाओं में लाखों पन्ने लिखे गए। उन्होंने एक अंग्रेजी चैनल से कहा कि दो आयोगों ने जांच की और कई साल से अदालतों में सुनवाई चल रही है और अंतिम फैसला दिया जा चुका है। वीडियो के बारे में पूछने पर कार्तिकेयन ने कहा कि मुझे इस बारे में कुछ भी याद नहीं है।