फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिस्टम में भी खूब दखल रहा नामधारी का

Fri, 23 Nov 2012 12:13 PM IST
अजित सिंह राठी/देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
इस समय वक्त ने करवट बदली तो राजनेताओं का मिजाज बदल गया, वर्ना इससे पहले तो सभी ने दलगत भावना से ऊपर उठकर सुखदेव सिंह नामधारी की मदद की। एक साल पहले नामधारी के स्टोन क्रशर पर छापा डालने के बाद निकाली गई करोड़ों की रिकवरी पर कोई कार्रवाई न होना इस बात का सबूत है। साथ ही पुलिस की संस्तुति के बावजूद दो शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण प्रकरण भी सरकारी व्यवस्था में फंसे और नामधारी दोनों असलहों के साथ घूम रहा है।
विज्ञापन


सरकारी सिस्टम पर नामधारी के प्रभाव की पहली बानगी देखिए। ऊधमसिंह नगर में दोराहा नामक स्थान पर हाईवे पर एक बाइक सवार शाकिर से झगड़े के बाद नामधारी और उसके समर्थकों ने फायरिंग की। थाना बाजपुर पुलिस ने छह मार्च 2009 को डीएम कार्यालय को भेजी रिपोर्ट में शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की। रायफल का यह लाइसेंस पटियाला (पंजाब) से बना है।

डीएम कार्यालय ने इस मामले में पहला नोटिस ही तीन साल बाद मार्च 2012 को जारी किया। डीएम न्यायालय में इस मामले में आगामी तीन दिसंबर को बहस होनी है। इसी तरह से डीबीबीएल (डबल बैरल गन) का लाइसेंस निरस्त करने की एक संस्तुति चार जुलाई 2003 में की गई। नौ साल बाद भी इस प्रकरण पर डीएम कोई निर्णय नहीं ले सके। इस मामले में भी आगामी तीन दिसंबर को अंतिम बहस होनी है।
विज्ञापन


अहम बात यह है कि लाइसेंस निरस्तीकरण संस्तुति के बाद इसी तरह ही कई वारदातें हो चुकी हैं। दोनों असलहे नामधारी के पास हैं और संस्तुतियां डीएम के पास लंबित हैं।

एक अन्य मामला करोड़ों की रिकवरी का है। सूत्रों ने बताया कि लगभग एक साल पहले वाणिज्य कर विभाग की एक टीम ने सुखदेव सिंह नामधारी के स्टोन क्रशर पर छापा मारा। यहां तमाम अनियमितताएं मिलीं और जोड़-घटाने के बाद विभाग ने पांच करोड़ रुपए से ज्यादा की रिकवरी निकाली। लेकिन इस मामले में भी कोई कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। बताया जा रहा है कि प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के हस्तक्षेप से मामला एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें