शराब व्यवसायी पोंटी चड्ढा के पैसों के बूते पर सुखदेव सिंह नामधारी ने अपने और परिजनों के नाम पर जमीनों की खूब रजिस्ट्री करवाई। हाल ही में नामधारी ने रुद्रपुर शहर के मेन बाजार की एक विवादित बिल्डिंग का सौदा करोड़ों में किया है।
जानकारों का कहना है कि पोंटी शराब व्यवसाय में वर्चस्व के लिए अपने विश्वासपात्रों के नाम पर बेनामी संपत्तियां भी खरीदता था। सूबे की आबकारी नीति के मुताबिक लाटरी सिस्टम पर आधारित शराब की एक दुकान के एलॉटमेंट के लिए एक पते पर एक ही फार्म डाल सकता है। इसके लिए आवेदनकर्ता का स्थानीय निवासी होना जरूरी है।
पोंटी शराब के कारोबार में पैसा तो लगा सकते थे। मगर लाटरी सिस्टम में हिस्सा लेने के लिए इतने स्थानीय निवासी और हैसियत प्रमाण पत्र आदि का इंतजाम करना उनके लिए थोड़ी टेढ़ी खीर थी। इस पर पोंटी ने शराब के कारोबार में यहां अपना दबदबा बनाए रखने के लिए अपने सबसे विश्वासपात्र नामधारी को चुना और नामधारी को पैसा दिया, जिसके बूते पर पिछले छह वर्षों में नामधारी ने अपने और अपने रिश्तेदार व जान-पहचान वालों के नाम खूब रजिस्ट्रियां करवाईं, जिसकी कीमत 35 करोड़ से अधिक की बताई जाती है।
इसके बाद इन लोगों ने शराब की दुकानों का एलॉटमेंट कराने के लिए लॉटरी सिस्टम में हिस्सा लिया, जिनके नाम दुकानें एलॉट होने से शराब के कारोबार पर आज भी पोंटी का कब्जा बरकरार है। बताया जाता है कि अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए नामधारी जमीन की रजिस्ट्री के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय के अफसरों को लेकर नोएडा जाता था और पोंटी उन्हें अपने सामने बैठाकर रजिस्ट्रियां करवाते थे।
रजिस्ट्रार कार्यालय के कुछ लोगों का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार अगर पिछले छह वर्षों में नामधारी और उनके परिजनों की नाम हुई जमीनों की रजिस्ट्रियों की जांच करे तो करोड़ों रुपये की हेराफेरी उजागर हो सकती है। चर्चा है कि पोंटी के पैसे से नामधारी ने रुद्रपुर शहर के मेन बाजार में हाल ही में एक विवादित बिल्डिंग का सौदा करोड़ों में किया है।