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फांसी से पहले क्या था याकूब का आखिरी बयान?

Thu, 30 Jul 2015 04:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उलाजा, नई दिल्ली
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'मेरी फांसी का का राजनीतिकरण किया गया है। मैं मरने जा रहा हूं। कोई चमत्कार ही मुझे बचा सकता है।' ये बातें 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट्स के दोषी याकूब मेमन ने अपनी फांसी से पहले कही थीं।
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मेमन ने ये बातें जेल में उसकी बैरक के पास तैनात सुरक्षा गार्ड से कही थीं। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर सुरक्षा गार्ड ने अंग्रेजी अखबार मिड डे को बताया कि आम तौर पर शांत रहने वाला याकूब मेमन अपनी फांसी के एक दिन पहले काफी घबराया हुआ था।

वो हमसे कभी कोई बात नहीं करता था। वो मुझसे कई बार पूछता था, कि सुप्रीम कोर्ट में क्या हो रहा है। याकूब ने सुबह के नाश्ते में केवल उपमा खाया था, लेकिन उसने दिन का खाना नहीं खाया।
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उम्दा चार्टर्ड एकाउंटेंट था याकूब

बताते चलें की आज सुबह महाराष्ट्र की नागपुर जेल में याकूब को फांसी दी जा चुकी है। याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन की बात करें तो उसकी कहानी एक उम्दा चार्टर्ड एकाउंटेंट से शुरू होकर एक खूंखार अपराधी के रूप में समाप्त होती है। याकूब का बचपन दक्षिण मुंबई के भायखला और भिंडी में गुजरा था।

1980 के दशक में पूरा मेमन परिवार माहिम की मच्छीमार कालोनी के एक ट्रांजिट कैंप में चला गया। उसके बाद माहिम के अल हुसैनी इमारत में शिफ्ट हो गया। 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के चंद घंटे पहले तक मेमन परिवार का यही ठिकाना था।
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