मुजफ्फरनगर दंगों की आग को लेकर सूबे की अखिलेश सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है।
केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया अजित सिंह ने मुजफ्फरनगर दंगों को प्रदेश सरकार प्रायोजित होने का आरोप लगाया है और इसकी तुलना गुजरात दंगों से कर डाली।
उन्होंने कहा है कि चुनावी फायदे के लिए दंगे करवाए गए हैं। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाग गई है और सांप्रदायिक मुद्दों को आधार बनाकर आगे बढ़ने का फैसला सरकार ने कर लिया है।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में अजित सिंह ने कहा कि गुजरात दंगों में जिस तरह से सरकार ने आंखें बंद रही थी। मुजफ्फरनगर में भी वैसा ही हुआ। कई दिनों से चिंगारी धधक रही थी। मगर सरकार की आंखें मूंदने से इसने आग का रूप ले लिया।
रालोद मुखिया ने कहा कि कई दिनों से भड़काऊ भाषण दिए जा रहे थे। संगीत सोम के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया। मगर आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया। कहीं न कहीं प्रदेश सरकार की पूरी भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि चुनाव में सपा के पास कोई चुनावी मुद्दा नहीं है, इसलिए ऐसा किया गया।
अजित सिंह ने कहा कि यह सरकार बार बार विफल हो रही है। भाजपा के हिंदुत्व आंदोलन की वजह को भी दंगों पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका।
वहीं रालोद की ओर से मदद नहीं मिलने के चलते जाट समुदाय की नाराजगी के सवाल पर अजित सिंह कहते हैं कि हमने अपनों के बीच में जाने की कोशिश की मगर जाने नहीं दिया गया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो कुछ हुआ वह ठीक नहीं हुआ। सदियों पुराना भाईचारा तोड़ने की कोशिश की गई। अब शांति स्थापित होनी चाहिए। राज्य सरकार को चाहिए कि वह इस दिशा में काम करें।