पाकिस्तान में तालीमयाफ्ता होने के लिए मलाला को भले ही आतंकियों से मोर्चा लेना पड़ा हो, लेकिन अपने यहां तालीम के प्रति मुस्लिम समाज की युवतियों की ललक बढ़ रही है। इन्हें अब दहलीज में सिमटना मंजूर नहीं है।
अपने समाज को बदलने का जज्बा रखने वाली युवतियों में देश के प्रति कुछ कर गुजरने की तमन्ना है।
अलीगढ़, मुरादाबाद जैसे छोटे शहरों से भी मुस्लिम लड़कियां शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। ईद के मौके पर कुछ युवतियों से बातचीत में पता चला कि वे नए क्षेत्रों में भी आसमान छूना चाहती हैं।
आजादी की राह में अब भी कई मुश्किलें
जामिया मिलिया इस्लामिया में बीएड कर रही लुबाना अंसारी कहती हैं कि मुस्लिम लड़कियों की आजादी की राह में अब भी कई मुश्किलें हैं।
समाज से उनका कहना है कि वे ईदी में महिलाओं को आजादी और शिक्षा से जुड़ने का अधिकार दें। शिक्षिका बनकर वह खुद मुस्लिम समाज के लोगों की सोच बदलना चाहती हैं।
कच्चे फर्श पर पली-बढ़ी अलीगढ़ के ताला मजदूर शाहबुद्दीन अली की गोल्ड मेडलिस्ट बेटी अमरीन पर्शियन की शिक्षिका बनकर समाज को नई दिशा देना चाहती हैं।
अमरीन ने पांच महीने पहले अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी में हुए दीक्षांत समारोह में बीए ऑनर्स (पर्शियन) में गोल्ड मेडल हासिल किया है। एएमयू में पीजी कर रहीं अमरीन के इरादे से तीन छोटी बहनों को उच्च शिक्षा के लिए बल मिला है।
समाज की सोच में बदलाव जरूरी
सीबीएसई की इंटरमीडिएट परीक्षा में दिल्ली रीजन से आर्ट्स में टॉप करने वाली मोमिना शेख आईएएस अफसर बनना चाहती हैं। वह बेटियों के प्रति अपने समाज की सोच बदलना चाहती हैं।
ऑटो ड्राइवर की बेटी मोमिना इन दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स कर रही हैं। वह बताती हैं कि जब स्कूल जाती थी तो रिश्तेदार विरोध करते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
लखनऊ विश्वविद्यालय से एमबीए में गोल्ड मेडलिस्ट दोआ नकवी ने बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी ठुकरा कर टीचिंग चुनी है।
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अरबी, उर्दू-फारसी यूनिविर्सिटी में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर दोआ कहती हैं कि जब सभी शिक्षा पाएंगे तभी वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहेंगे।
राजस्थान से आकर आईआईटी रुड़की में बीटेक कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही फरहीन ने बताया कि ऐतराज के बावजूद परिवार में वह पहली लड़की है जो इंजीनियरिंग के लिए बाहर आई है। उनका सपना है कि वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने।
आईआईटी रुड़की में पढ़ाई कर रही बिहार निवासी शफक्कत अली ने बताया कि वह आर्किटेक्ट बन कर अपने देश की सेवा करना चाहती हैं। पढ़ाई के प्रति समर्पण के चलते ही वह पिछले चार वर्षों से घर नहीं जा पाई हैं।
मुरादाबाद के निर्यातक अथर सुल्तान की बेटी अरीबा बिजनेस में ग्रेजुएशन करने के बाद अब तीर्थंकर महावीर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट से एमबीए कर रही हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया की मुरादाबाद ब्रांच की सचिव भाषा बताती हैं कि तीन मुस्लिम लड़कियां यहां सीए कोर्स कर रही हैं।
'शरीयत की पाबंदियों का ध्यान रखे लड़कियां'
मदरसा जामिया इमाम अनवर शाह के वरिष्ठ मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा है कि मुस्लिम लड़कियों का आईआईटी और आईआईएम में सफलता प्राप्त करना अच्छी बात है, लेकिन उन्हें तकनीकी शिक्षा ग्रहण करते समय शरीयत की पाबंदियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
--यह प्रतियोगिता का दौर है। मेहनत करके आगे बढ़ने की जरूरत है। इससे कौम के लिए रास्ता बनेगा। जिस कौम में महिलाएं पढ़ी-लिखी होंगी, उसमें नई पीढ़ी की तालीम भी बेहतर होगी। बच्चे आगे चल कर नमून-ए-अमल बनेंगे।-मौलाना शहाबउद्दीन रजवी, राष्ट्रीय महासचिव, ऑल इंडिया जमात रजा मुस्तफा, सुन्नी बरेलवी मरकज, दरगाह आला हजरत, बरेली
--कुछ हासिल करने के लिए लड़कियों का शिक्षित होना बहुत अहम है। इसके लिए परिवार का समर्थन भी जरूरी है। सिर्फ यह कहते रहना ठीक नहीं है कि लड़कियों को केवल घर संभालना है।-आईएएस सहरिश सईद असगर (जम्मू-कश्मीर की पहली महिला आईपीएस)