फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां मुस्लिम नहीं बन सकते राम या सीता, चौंका देगी वजह

Mon, 19 Oct 2015 03:52 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
सर्वधर्म सद्भाव की नगरी अयोध्या राजनीति दांव पेंच से कभी दूर नहीं रह पाई बल्कि हमेशा राजनीति का केंद्र ही रही। कभी राम मंदिर के बहाने तो कभी हिंदू मुस्लिम के बहाने।
विज्ञापन


आए दिन कोई न कोई ऐसी खबर आती है जो अयोध्या के सद्भाव के प्रति आम जन का विश्वास और बढ़ाती है लेकिन बीते कुछ दिनों से गाय और मीट की बहस ने यहां की एकता और सद्भाव को भी छलने का काम किया है।

लगातार 50 सालों से चल रही उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में मुमताज नगर की रामलीला अयोध्या के सद्भाव का दर्शन रही है लेकिन बीते 2 सालों से इस रामलीला से मुस्लिमों का 'बायकॉट' किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्योंकि वो मीट खाते हैं!

यूं तो एक वक्त था जब रामलीला के प्रमुख पात्रों का रोल निभाने वालों में मुस्लिम नाम शामिल होते थे लेकिन अब वो वक्त खत्म हो रहा है। मुमताजनगर की रामलीला का प्रबंधन मुस्लिमों द्वारा ही किया जाता था लेकिन अब वो नहीं कर सकते क्योंकि वो 'मीट' खाते हैं।

जो मुस्लिम पहले रामलीला में राम, लक्ष्मण,सीता और हनुमान जैसे प्रमुख पात्रों का रोल निभाते थे वे अब इस रामलीला से बाहर कर दिए गए हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष माजिद अली ने बताया कि 'कुछ स्थानीय लोगों को इस बात पर आपत्ति थी कि मुस्लिम लोग रामलीला में प्रमुख पात्रों का रोल क्यों निभा रहे हैं?'

उनको इस बात का एतराज है कि जो मुस्लिम लोग मीट खाते हैं इसलिए उन्हें भगवान के रोल नहीं देना चाहिए। मुमताजनगर रामलीला कमेटी के सदस्य बलधारी यादव का कहना है कि जो महिलाएं रामलीला देखने आती हैं वो राम चरित मानस के प्रमुख पात्रों का रोल निभा रहे लोगों के पैर भी छूती हैं, ऐसे उनकी धार्मिकता को ध्यान में रखते हुए हमने उन मुस्लिमों की जगह हिन्दूओं को वह पात्र का रोल निभाने के लिए दे दिया गया।

मुमताज नगर की ये रामलीला 1963 में शुरु की गई थी। मुमताजनगर के ही नसीम जो पेशे से दर्जी थे वो अपनी छोटी सी कमाई में से रामलीला का आयोजन कराते थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें